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यमुना बेसिन को मिलेगा नया जीवन, यूपी कैबिनेट ने दो डैम परियोजनाओं को दी हरी झंडी

लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के अनुरूप उत्तर प्रदेश का सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग प्रदेश की कृषि व्यवस्था को आधुनिक और सुगम बनाने में जुटा है। इसी क्रम में पूर्वी उत्तर प्रदेश के तीन महत्वपूर्ण जनपदों—सिद्धार्थनगर, महाराजगंज और गोरखपुर में ‘प्रेशर सिंचाई प्रणाली’ (Pressure Irrigation System) के माध्यम से एक बड़ी सिंचाई क्रांति की शुरुआत की गई है। इस आधुनिक तकनीक का उद्देश्य कम जल उपलब्धता वाले क्षेत्रों में भी प्रभावी सिंचाई सुनिश्चित करना है, ताकि प्रदेश के किसान जल संकट की चिंता किए बिना बेहतर फसल उत्पादन कर सकें।

111 करोड़ की 7 बड़ी परियोजनाएं

प्रदेश सरकार इन तीन जनपदों में लगभग 111.62 करोड़ रुपये की लागत से 7 प्रमुख प्रेशर सिंचाई परियोजनाओं का विकास कर रही है। इन परियोजनाओं के पूर्ण होने पर कुल 4405 हेक्टेयर क्षेत्र की सिंचाई क्षमता में वृद्धि होगी, जिससे क्षेत्र के लगभग 57 गाँव सीधे तौर पर लाभान्वित होंगे। जल संसाधन विभाग का यह प्रयास न केवल पानी के बर्बादी को रोकेगा, बल्कि सिंचाई वितरण प्रणाली को भी सुदृढ़ करेगा।

निर्माण कार्य अंतिम चरण में

परियोजनाओं के क्रियान्वयन में सिद्धार्थनगर जनपद की पड़रिया प्रेशर सिंचाई प्रणाली का निर्माण पूरा कर लिया गया है, जिसके तहत 3.6 किलोमीटर लंबी नहर प्रणाली विकसित कर 454 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई विस्तार किया गया है। इसी तरह, सिद्धार्थनगर और महाराजगंज की कैम्पियरगंज शाखा पर चल रहा कार्य भी लगभग 95 प्रतिशत पूरा हो चुका है। इससे करीब 600 हेक्टेयर अतिरिक्त क्षेत्र में पानी पहुँचेगा और 9 गाँवों के किसान रबी व खरीफ की फसलों के लिए आत्मनिर्भर बनेंगे।

गोरखपुर और अन्य रजवाहा परियोजनाएं

महाराजगंज के मैहनवा, बृजमनगंज और फरेंदा रजवाहा पर भी प्रेशर सिंचाई परियोजनाओं का काम तेजी से चल रहा है, जिनमें से अधिकतर पूर्णता की ओर हैं। वहीं, गोरखपुर जनपद में बैकुंठपुर रजवाहा पर 4.6 किलोमीटर लंबी वितरण प्रणाली विकसित की जा रही है। इस अकेले प्रोजेक्ट से गोरखपुर के 10 गाँवों के किसानों को फायदा होगा और 690 हेक्टेयर भूमि सिंचित होगी।

कृषि उत्पादकता और किसानों की आय में वृद्धि

प्रेशर सिंचाई प्रणाली पानी के अधिकतम उपयोग को सुनिश्चित करती है, जिससे सिंचाई की लागत कम होती है और फसलों को सही समय पर पानी मिलता है। विभाग की यह पहल न केवल कृषि उत्पादकता को बढ़ाएगी, बल्कि भविष्य में किसानों की आय को दोगुना करने के लक्ष्य को प्राप्त करने में भी एक महत्वपूर्ण कड़ी साबित होगी।

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