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नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट: विकास का प्रतीक या राजनीतिक विवाद का केंद्र?

ग्रेटर नोएडा: नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का भव्य लोकार्पण समारोह संपन्न हो गया है, लेकिन इस ऐतिहासिक उपलब्धि के बाद अब जिले के राजनीतिक गलियारों में असंतोष की सुगबुगाहट तेज हो गई है। जहां एक ओर इस प्रॉजेक्ट को विकास का नया अध्याय बताया जा रहा है। वहीं दूसरी ओर मंच प्रबंधन और शिलापट को लेकर उठे सवालों ने स्थानीय राजनीति के पारे को बढ़ा दिया है।

समारोह के दौरान मंच पर प्रधानमंत्री के कड़े सुरक्षा प्रोटोकॉल के चलते सीमित स्थान था। इस कारण जिले के कई कद्दावर और स्थानीय नेताओं को मंच पर जगह नहीं मिल सकी। इनमें भाजपा के क्षेत्रीय अध्यक्ष सतेंद्र सिसोदिया समेत संगठन के कई वरिष्ठ पदाधिकारी और जमीनी नेता शामिल बताए जा रहे हैं। सोशल मीडिया पर यह चर्चा का विषय बना हुआ है कि जिन चेहरों ने वर्षों तक क्षेत्र में संगठन को मजबूत किया और प्रॉजेक्ट की नींव तैयार करने में भूमिका निभाई, उन्हें मुख्य मंच से दूर रखा गया। समर्थकों के बीच इसे लेकर भारी नाराजगी देखी जा रही है।

शिलापट से विधायकों के नाम नदारद

विवाद का दूसरा बड़ा केंद्र नोएडा एयरपोर्ट परिसर में लगा शिलापट है। यह शिकायत वायरल हो रही है कि शिलापट पर जिले के किसी भी विधायक का नाम नहीं है। राजनीतिक हलकों में इसे स्थानीय जनप्रतिनिधियों की गरिमा की अनदेखी के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि कुछ जानकार इसे केवल प्रोटोकॉल का हिस्सा मान रहे हैं, लेकिन सोशल मीडिया पर क्रेडिट वॉर शुरू हो गई है। लोग पूछ रहे हैं कि क्या विकास के इस बड़े विज्ञापन में स्थानीय जनप्रतिनिधियों का कोई स्थान नहीं है।

प्रोटोकॉल की दलील

इस मामले पर प्रशासनिक अधिकारियों और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का रुख स्पष्ट है। उनका कहना है कि पूरा कार्यक्रम केंद्र सरकार और पीएमओ के तय पर्यटक के तहत था। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ऐतिहासिक प्रॉजेक्ट्स के उद्घाटन के समय ऐसी चर्चाए स्वाभाविक है, लेकिन यदि समय रहते इन्हें शांत नहीं किया तो कार्यकर्ताओं के मनोबल पर असर पड़ सकता है।

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