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जेवर: इतिहास से आधुनिकता तक का अविस्मरणीय सफर

नई दिल्ली। मैं जेवर हूं… आज मेरी पहचान कंक्रीट के लंबे रनवे, आसमां से बातें करते गगनचुंबी टावरों और एशिया के सबसे बड़े हवाई अड्डों में से एक के रूप में हो रही है, लेकिन क्या आप जानते हैं मेरी जड़ें उस माटी से जुड़ी हैं जहां कभी ऋषियों के मंत्र गूंजते थे।

त्रेता का तप, द्वापर का युद्ध और आधुनिक भारत के औद्योगिक उदय को मैंने साक्षात देखा है। और अब मेरा सौभाग्य है, मुझ पर विकास, विकसित देश के लिए एक नया अध्याय लिख रहा है।

तभी, आज दुनिया की निगाह मुझ पर टिकी हैं, तो मेरी माटी मिसाल से वैश्विक पहचान का बोध कर रही है। मैंने तो कभी सोचा न था, एक ग्रामीण अंचल से ‘वैश्विक हब’ की अनुभूति होगी। देश के ‘जेवर’ के रूप में मेरा उद्घोष होगा।

महर्षि जाबालि का जेवर हूं 

आपको तो पता भी नहीं होगा, जिस जेवर का नाम आज दुनिया जान रही है, एक्स पर ट्रेंड कर रहा है, गूगल पर सर्चिंग में बार-बार घूम रहा है। मेरे इस नाम के पीछे भी एक गहरा आध्यात्मिक अर्थ छिपा है। प्राचीन काल में मुझे ‘जाबालिपुर’ के नाम से जाना जाता था।

मेरा यह नाम महर्षि जाबालि के सम्मान में पड़ा, जिन्होंने इसी पावन धरा पर घोर तपस्या की थी। कालांतर में ‘जाबालि’ अपभ्रंश होते…होते ‘जेवर’ बन गया। आज भी मेरे गांव के बड़े बुजुर्ग आपको बता देंगे। मेरी भौगोलिक स्थिति हमेशा से ही महत्वपूर्ण रही है।

यमुना मैया के बाएं तट पर बसा मेरा क्षेत्र प्राचीन काल से ही सांस्कृतिक धरा का केंद्र रहा है। पुरातात्विक अवशेष भी हजारों साल पुरानी पेंटेड ग्रे वेयर (चित्रित धूसर मृदभांड) संस्कृति के प्रमाण से इसकी बानगी करते हैं।

रामायण से महाभारत और क्रांति 

मेरे आस-पास का कोना-कोना लोकगाथाओं और पौराणिक स्मृतियों से भी पल्लवित है। मेरे समीप स्थित ‘बिसरख’ गांव, वही रावण के पिता का, विश्रवा ऋषि का जन्मस्थान माना जाता है।

वहीं ‘दनकौर’ में गुरु द्रोणाचार्य का प्राचीन आश्रम, जहां कौरवों और पांडवों ने शस्त्र विद्या सीखी थी। एकलव्य की भक्ति और गुरुभक्ति का भी साक्षी बना। अभिभूत हूं, इतिहास पर। इन महान चरित्रों की स्मृतियां आज भी मेरी मिट्टी में रची-बसी हैं, जो मुझे आधुनिक शहर के साथ जीवंत सांस्कृतिक धरोहर भी बनाती हैं।

क्रांति के दौर को याद करोगे तो भी मेरे गौरव को याद करोगे। 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में यहां के क्रांतिकारियों ने अंग्रेजों को धूल चटाई। दादरी और जेवर क्षेत्र के 84 क्रांतिकारियों को अंग्रेजों ने बुलंदशहर के ‘काला आम’ पर फांसी दी थी।

क्रांतिकारी राम प्रसाद ‘बिस्मिल’ ने भी मैनपुरी षड्यंत्र के बाद मेरे निकटवर्ती गांवों में शरण ली थी। बलिदानी भगत सिंह को कैसे भूल जाऊं, नोएडा-ग्रेटर नोएडा के नलगढ़ा गांव में ही तो भूमिगत रहकर बमों का परीक्षण किया था। मेरी धरती ऐसे ही बलिदानियों के रक्त से अभिसिंचित है।

गांव से शहर और उड़ान से मानचित्र तक 

फिर आई, मेरे गांव से शहर हो जाने की बारी, आजादी तक जहां मैं बुलंदशहर का हिस्सा था। विकास के दरवाजे बड़े हुए तो मेरा मिलन 9 जून 1997 को गौतमबुद्ध नगर जिले से हो गया। धीरे-धीरे मेरी धरा, विकास के बीज बोने लगी, जिसे आपकी भाषा में शहरीकरण भी कहते हैं।

यमुना एक्सप्रेसवे क्या बना, देश की राजधानी भी करीब से दिखने लगी। इस दौर में मेरी भौगोलिक दूरियां तो तेजी से सिमट रहीं थीं, लेकिन वास्तविक पहचान अभी भी एक कृषि प्रधान ग्रामीण क्षेत्र में ही छिपी थी।

मेरे किसान भाई देश के उज्ज्वल भविष्य के लिए विकास को पोषित करने के लिए धरा की बाहें फैलाए खड़े हो गए। …और जब मोड़ आया, मेरे आंगन से उड़ान भरने का तो मेरी पहचान, मेरा नाम एशिया के सबसे बड़े एयरपोर्ट के रूप में जुड़ गया।

मैं जेवर स्थित सबसे बड़ा एयरपोर्ट पुकारा जाने लगा। देखते ही देखते, गूगल मुझे ट्रेंड करने लगा, हर कोई जेवर की लोकेशन से परिचित होने लगा।

मानचित्र में मुझे ऐतिहासिक, पौराणिकता के साथ-साथ विकास की भी पहचान मिल गई। और आज देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मेरे हवाई अड्डे के पहले चरण का उद्घाटन कर मेरे इतिहास को विकास का मजबूत पहिया बना दिया।

कल तक जहां गेहूं-सरसों की फसलें लहलहाती थीं, आज वहां देश विकास की उड़ान भर रहा है। और हां, अब मैं तहसील नहीं, वैश्विक ब्रांड बन देश का नाम रोशन कर रहा हूं।

यूपी की इकोनॉमी का इंजन बनता जेवर 

जेवर क्षेत्र अब केवल एक तहसील नहीं, बल्कि एक आर्थिक महाशक्ति बन रहा है। गौतमबुद्ध नगर की प्रति व्यक्ति आय अब 10.17 लाख तक पहुंच गई है, जो उत्तर प्रदेश के औसत से लगभग 10 गुना अधिक है।

यह आंकड़ा इसे वैश्विक स्तर पर उच्च-आय वाले क्षेत्रों की कतार में खड़ा करता है। यमुना प्राधिकरण के आंकड़ों के अनुसार, एयरपोर्ट की घोषणा के बाद से क्षेत्र में एक लाख करोड़ से अधिक का निवेश आकर्षित हुआ है।

यहां विकसित हो रहे मेडिकल डिवाइस पार्क, टाय पार्क और डाटा सेंटर हब से सालाना अरबों डालर के टर्नओवर की उम्मीद है, जो भारत के निर्यात को बड़ी मजबूती देगा।

जेवर की भौगोलिक स्थिति इसे ‘मल्टी-माडल कनेक्टिविटी’ का सबसे बेहतरीन उदाहरण बनाती है। यह क्षेत्र यमुना एक्सप्रेसवे, ईस्टर्न पेरीफेरल एक्सप्रेसवे और निर्माणाधीन दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे के सीधे लिंक से जुड़ा है। ये, इसे उत्तर भारत के लाजिस्टिक्स हब के रूप में स्थापित करता है।

इतना ही नहीं इसी जेवर के पास सेक्टर-21 में एक हजार एकड़ में बन रही फिल्म सिटी इस क्षेत्र की ‘साफ्ट पावर’ को वैश्विक पहचान दिलाएगी।

यह न केवल हालीवुड और बालीवुड के स्तर की अत्याधुनिक तकनीक से लैस होगी, बल्कि डिजिटल मीडिया, एनिमेशन और गेमिंग उद्योगों के लिए भी एक बड़ा केंद्र बनेगी।

इससे लगभग 50,000 प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होने का अनुमान है, जिससे जेवर एक ‘कल्चरल हब’ के रूप में चमकेगा। इन विशाल परियोजनाओं को उन किसानों के सहयोग से साकार किया गया है, जिन्‍होंने अपनी भूमि विकास के लिए दी, जिससे अब वे स्‍वयं औद्योगिक प्रगति के भागीदार बन रहे हैं।

इसलिए पीएम ने कहा नोएडा है ग्रोथ इंजन 

नोएडा अंतरराष्‍ट्रीय एयरपोर्ट के उद्घाटन ने न केवल प्रदेश बल्कि पूरे देश की आर्थिकी को नई दिशा देने का संकेत दिया है। प्रधानमंत्री का संबोधन केवल एक इन्‍फ्रा परियोजनाओं का बुके यानी पुष्‍प गुच्‍छ नहीं था, ये तो बदलते भारत की उस शक्ति का प्रदर्शन था जो वैश्विक संकट के बीच भी अडिग खड़ा है।

तभी पीएम ने इस बात पर जोर दिया कि यह हवाई अड्डा केवल विमानों के आने-जाने का जरिया नहीं, ये तो अर्थव्‍यवस्‍था का गेटवे है…यानी लॉजिस्टिक गेटवे। चूंकि आगरा, मथुरा, अलीगढ़, मेरठ और गाजियाबाद जैसे क्षेत्रों को इससे सीधा लाभ मिलेगा जिससे पश्चिमी उप्र एक बड़े औद्योगिक हब के रूप में उभरेगा।

अब तक सभी ने पश्चिमी उत्‍तर प्रदेश को पारंपरिक गन्‍ने के कटोरे और समृद्ध कृषि क्षेत्र के रूप में ही जाना, देखा है। लेकिन जेवर स्थित इस अंतरराष्‍ट्रीय एयरपोर्ट के उद्घाटन ने पूरे क्षेत्र को, इस पश्चिमी बेल्‍ट को वैश्विक औद्योगिक हब में बदल दिया है।

देश के सबसे बड़े प्रदेश के नाते, प्रदेश से केंद्र तक की राजनीति में बड़ा सबकी दृष्टि इसी पर होती है। उसमें भी पश्चिमी उप्र का किसान वर्ग विशेष तौर पर हर राजनीतिक दल के लिए वोटों की मशीन जैसा होता है।

लेकिन वही किसान अब भी उन दलों के लिए राजनीतिक कोण में तो है, पर अब उसका संकल्‍प, उसका सम्‍मान, उसकी समृद्धि सिर्फ एक मतदाता बनकर नहीं रह गई है, अब वो देश की वैश्विक पहचान, देश के ग्रोथ इंजन, जीडीपी में भी गर्व से खड़ा हो रहा है।

इसलिए उसे सिर्फ मतदाता समझना और आसानी से अपने वोट बैंक के लिए इस्‍तेमाल कर लेना, रिझा लेना आगामी चुनाव में सत्‍तासीन और विपक्ष दोनों के लिए ही चुनौती भी होगा।

शंकाओं को जेवर मॉडल का जवाब

अभी ज्‍यादा समय दूर की बात नहीं है, जब देश में 30 से अधिक एयरपोर्ट तकनीकी या आर्थिक कारणों से धूल हो गए। इसी पृष्‍ठभूमि में जब जेवर स्थित एशिया के सबसे बड़े एयरपोर्ट के पहले चरण का उद्घाटन हुआ तो सवाल ये भी उठा कि क्‍या वाकई, देश के विकास का इंजन बन पाएगा, उन आशंकाओं को कुछ इन तार्किक तथ्‍यों से समझा जा सकता है।

अतीत में जो एयरपोर्ट बंद हुए उनमें अधिकांश क्षेत्रीय, छोटे शहरों के थे। जहां यात्री संख्‍या संकुचित, सीमित थी। लेकिन जेवर के साथ ऐसा नहीं है। यह दुनिया के सबसे व्‍यस्‍त हवाई क्षेत्रों में से एक दिल्‍ली सहित एनसीआर में है। जहां इंदिरा गांधी अंतरराष्‍ट्रीय हवाई अड्डा अपनी अधिकतम यात्री क्षमता, 10-12 करोड़ तक पहुंचने वाला है। उसकी क्षमताओं से आगे का ‘रोडमैप’ है ये एनआइए यानी नोएडा अंतरराष्‍ट्रीय हवाई अड्डा।

जी, ये विकल्‍प नहीं जरूरत के रूप में विकसित किया गया है। इसकी सबसे बड़ी ताकत यहां की कनेक्टिविटी भी साबित होगी, जो सिर्फ उड़ानों तक सीमित नहीं है। यमुना एक्‍सप्रेसवे, ईस्‍टर्न पेरीफेरल एक्‍सप्रेसवे, दिल्‍ली मुंबई एक्‍सप्रेसवे से सीधा जुड़ाव।

रेलवे की बात करें तो पाड टैक्‍सी, रैपिड रेल, मेट्रो नेटवर्क, इसे दिल्‍ली, नोएडा और आगरा तक जोड़ेगा। कार्गो हब, उत्‍तर भारत का लाजिस्टिक गेटवे ऐसे ही नहीं कहा गया। यह वह बिंदु है जो इसे ‘यात्री सेवा’ यानी यात्रियों के लैंड तक ही सीमित नहीं रखता बल्कि ‘व्‍यापार लैंड’ तक लेकर जाता है।

जेवर स्थित इस एयरपोर्ट के आसपास का क्षेत्र यमुना एक्‍सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण यानी यीडा का औद्योगिक गलियारा है, जिसके बारे में ऊपर विस्‍तार से भी बताया है, जहां हजारों करोड़ का निवेश परियोजनाएं ला रही हैं।

जब किसी एयरपोर्ट के चारों ओर एक जीवंत इकोसिस्‍टम होता है तो उसके आगे इसके भविष्‍य शक, शंका जताने वालों का सोच संकुचित का प्रमाण है। यह एयरपोर्ट-लेड सिटी का वैश्विक माडल बन रहा है। इसीलिए अनुमान है यह एयरपोर्ट प्रत्‍यक्ष-अप्रत्‍यक्ष रूप एक लाख से अधिक लोगों को रोजगार देगा।

हां, एक चुनौती है। दिल्‍ली सहित एनसीआर के ही आइजीआइ एयरपोर्ट के साथ अभी स्‍वस्‍थ प्रतिस्‍पर्धा जरूर रहेगी। इसके लिए एयरपोर्ट अथारिटी और सरकार को ओपन स्‍काई पालिसी और बेहतर स्‍लाट मैनेजमेंट पर काम करना होगा।

साथ ही मल्‍टी माडल कनेक्टिविटी जैसी योजनाओं को समय पर पूरा कर लोगों की उम्‍मीद को को विश्‍वास में बदलना होगा।

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