Rapid24news

Har Khabar Aap Tak

ग्रेटर नोएडा: बोड़ाकी रेलवे स्टेशन के विस्तार का रास्ता साफ, बिहार और पश्चिम बंगाल जाने वाली 70 ट्रेनें चलेंगी

ग्रेटर नोएडा: उत्तर प्रदेश में ग्रेटर नोएडा के बोड़ाकी रेलवे स्टेशन के विस्तार में अब अड़चनें खत्म हो गई हैं। दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के तहत बोड़ाकी के पास विकसित होने वाले मल्टीमॉडल ट्रांसपोर्ट हब (एमएमटीएच) प्रोजेक्ट के लिए 137 एकड़ जमीन की आवश्यकता थी। इस जमीन के करीब 50 प्रतिशत हिस्से पर लोग रहते थे। लेकिन सात गांवों के लगभग 1500 परिवारों ने अब जमीन देने की सहमति दे दी है।

स्टेशन के विस्तार के तहत 13 नए प्लेटफॉर्म बनाए जाएंगे, जो बोड़ाकी से खुर्जा की दिशा में होंगे। इसके साथ ही स्टेशन और यार्ड का कुल क्षेत्रफल लगभग 267 एकड़ हो जाएगा। जिन परिवारों की जमीन अधिग्रहित होगी, उन्हें शिव नाडर यूनिवर्सिटी के पीछे नए प्लॉट दिए जाएंगे।

एमएमटीएच प्रोजेक्ट और कनेक्टिविटी

एमएमटीएच परियोजना 358 एकड़ क्षेत्र में विकसित की जाएगी और इसे दो जोनों में बांटा गया है। जोन-1 में आईएसबीटी, क्षेत्रीय बस टर्मिनल (एलबीटी), मेट्रो रेल ट्रांजिस्ट सिस्टम और व्यावसायिक गतिविधियां शामिल होंगी। जोन-2 में बोड़ाकी रेलवे स्टेशन का विस्तार होगा।

बोड़ाकी से पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल जाने वाली लगभग 70 ट्रेनों का परिचालन किया जाएगा। एक्वा लाइन मेट्रो भी स्टेशन से जुड़ी जाएगी, जिसमें डिपो से बोड़ाकी तक मेट्रो का विस्तार होगा। बस डिपो के लिए 12.5 एकड़, मेट्रो के लिए 5.5 एकड़ और व्यावसायिक गतिविधियों के लिए 65 एकड़ भूमि आरक्षित की गई है। इन सभी सुविधाओं को जोड़ने के लिए आरओबी, एफओबी, स्काईवॉक और सबवे का निर्माण किया जाएगा।

रेलवे अधिकारियों का कहना है कि दिल्ली के रेलवे स्टेशनों पर भीड़ बहुत अधिक है। इसलिए बोड़ाकी जैसे बड़े स्टेशन तैयार किए जा रहे हैं ताकि दिल्ली पर लोड कम हो और ट्रेनों की आवाजाही सुचारू हो।

जमीन अधिग्रहण और परिवारों का पुनर्वास

बोड़ाकी, चमरावली, दादरी, तिलपता, करनवास, पाली, पल्ला और चमरावली रामगढ़ के सात गांवों में रहने वाले कुल 1800 परिवारों को दूसरी जगह शिफ्ट किया जाएगा। किसानों को उनके अधिग्रहित घरों के बदले जमीन शिव नाडर यूनिवर्सिटी के पास दी जाएगी। अधिकारियों ने बताया कि किसानों ने भूमि देने के लिए पूरी सहमति दे दी है और जल्द ही प्रोजेक्ट के लिए जमीन पर कब्जा लिया जाएगा।

किसानों और प्रशासन के बीच सहयोग से जमीन का मसला सुलझ गया है और प्रोजेक्ट अब आगे बढ़ सकता है।

एनजी रवि कुमार, सीईओ, ग्रेनो अथॉरिटी

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

WhatsApp