नोएडा मुआवजा घोटाला: SIT का बड़ा खुलासा, 10% कमीशन का खेल उजागर
नोएडा में जमीन अधिग्रहण के बदले किसानों को मुआवजा देने में हुई अनियमितता की जांच कर रहे विशेष जांच दल (एसआईटी) ने सुप्रीम कोर्ट में कहा है कि ‘किसानों को तय रकम से अधिक मुआवजा दिलवाने के नाम पर प्राधिकरण के अधिकारियों से 10 फीसदी कमीशन तय हुआ था।’ एसआईटी ने बुधवार को शीर्ष अदालत में अपनी आरंभिक जांच रिपोर्ट पेश करते हुए यह जानकारी दी है।
चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की बेंच के समक्ष यह रिपोर्ट पेश की गई है। मामले की सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से पेश वकील ने बेंच से कहा कि ‘अब तक की जांच में यह सामने आया है कि जमीन अधिग्रहण के बदले तय रकम से अधिक मुआवजा दिलाने के बदले में अफसरों के साथ 10 फीसदी कमीशन देने की बात तय हुई थी। सरकार की ओर से वकील रुचिरा गोयल ने आरंभिक रिपोर्ट की जानकारी देते हुए मामले की आगे की जांच पूरी करने के लिए शीर्ष अदालत से दो माह का समय देने की मांग की। बेंच को बताया गया कि जांच के दौरान कई किसानों ने अपने बयान में कहा है कि ‘तय रकम से अधिक मुआवजा दिलाने के बदले अधिकारियों ने 10 फीसदी रुपये नकद में लिए थे। हालांकि, एसआईटी ने बेंच से यह भी कहा है कि सालों पुराने इस मामले में रुपये का लेन-देन पता करना बेहद मुश्किल और समय लेने वाला है। एसआईटी ने बेंच से कहा है कि जिन 160 किसानों को अतिरिक्त मुआवजा दिया गया है, उनमें से अधिकांश का बयान दर्ज हो गया है और जांच जारी है।
सुप्रीम कोर्ट ने छह सप्ताह में जांच पूरी करने का दिया निर्देश
विशेष जांच दल ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि इस घोटाले में शामिल अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए सरकार के सक्षम प्राधिकार से अनुमति मांगी गई है। इसके बाद बेंच ने जांच धीमी गति से होने पर नाराजगी जाहिर की और एसआईटी को दो माह का वक्त देने से इनकार कर दिया। बेंच ने एसआईटी को छह सप्ताह के भीतर जांच पूरी करने और रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दिया है। अब मामले की सुनवाई 13 जुलाई तय की गई है।
किसानों के खिलाफ कार्रवाई न करने का आश्वासन
सुप्रीम कोर्ट ने 10 दिसंबर, 2025 को नोएडा में जमीन अधिग्रहण के बदले किसानों को मुआवजा देने में हुई अनियमितता की जांच के लिए गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) को पिछले 10 से 15 सालों में प्राधिकरण के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) के पद पर रहे अधिकारियों और अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच करने का निर्देश दिया था। इसके साथ ही, शीर्ष अदालत ने साफ कर दिया था कि उन किसानों को जांच के दौरान परेशान नहीं किया जाएगा, जिन्हें कथित तौर पर तय रकम से अधिक मुआवजा मिला।
बेंच ने एसआईटी को मामले की जांच पूरी करने के लिए दो माह का अतिरिक्त समय देते हुए यह निर्देश दिया था। चीफ जस्टिस ने साफ किया था कि जिन किसानों को अधिक भुगतान किया गया है, उन्हें सजा नहीं दी जाएगी और उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी। उन्होंने यह भी साफ कर दिया था कि जांच के दौरान किसानों को परेशान नहीं किया जाना चाहिए।’
इस तरह से खेल शुरू हुआ
नोएडा में साल 1982 में किसान को उसकी 10-15 बीघा जमीन के लिए शुरुआती मुआवजा 10.12 रुपये प्रति वर्ग की दर से दिया गया। उसने 1993 में जिला अदालत का दरवाजा खटखटाया। अदालत ने दर बढ़ाकर 16.61 रुपये प्रति वर्ग गज भुगतान करने का आदेश दिया। मालिक को भुगतान कर दिया गया। साल 2015 में जमीन मालिक की कानूनी वारिस रामवती ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में फिर से मुआवजे का दावा दायर किया। अदालत ने याचिका खारिज कर दी। उसी वर्ष प्राधिकरण ने मुआवजा दर 297 रुपये प्रति वर्ग गज तय कर दी। इसी नीति का दुरुपयोग करते हुए नोएडा के दो अधिकारियों ने रामवती के खारिज दावे को लंबित दिखाकर 7.28 करोड़ रुपये की राशि जारी करवा ली। यहीं से खेल हुआ।
आवंटन घोटाले में दो अधिकारी जेल गए थे
नोएडा आवंटन घोटाले में सीबीआई की जांच हुई थी। मामले में दो दिग्गज अधिकारियों नीरा यादव और राजीव कुमार को जेल जाना पड़ा। घोटाले के कारण ही राजीव कुमार को समय से पहले सरकार ने जबरन रिटायर कर दिया था, जबकि नीरा यादव पहले स्वैच्छिक सेवानिवृति ले चुकी थीं।
लीज बैक में एडीएम बर्खास्त हो चुका
गढ़ी शहदरा गांव में लीज बैक के नाम पर घोटाला किया गया। वर्ष 2011 में जमीन की लीज बैक बाहरी लोगों और कंपनियों के नाम कर दी गई। इसमें करीब 3800 करोड़ रुपये का घोटाला हुआ। इस मामले में शासन ने एडीएम हरीशचंद्र को बर्खास्त किया था।
इन प्रमुख मामलों की सीबीआई जांच जारी
● आवासीय आवंटन घोटाला : वर्ष 2004 में आवासीय भूखंडों की योजना के ड्रॉ में बड़े स्तर पर हेराफेरी कर नेताओं, अफसरों के भूखंड निकाल दिए गए। शिकायत होने पर सीबीआई की देखरेख में इसका दोबारा से ड्रॉ हुआ। मामले की जांच सीबीआई कर रही है।
● होटल आवंटन घोटाला : वर्ष 2006 में नोएडा में 14 होटल भूखंडों का आवंटन सात हजार 400 रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर पर किया गया, जबकि यह आवंटन व्यावसायिक दरों पर होना था। यह मामला सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा और सुप्रीम कोर्ट ने जांच के बाद आवंटन की दर को बढ़ाकर 70 हजार रुपये मीटर कर दिया। इस मामले की सीबीआई जांच चल रही है।
● यादव सिंह प्रकरण : बसपा शासन काल में यादव सिंह नोएडा प्राधिकरण का सबसे चर्चित नाम रहा। उन पर फर्मों पर 954 करोड़ रुपये का ठेका देने का आरोप लगा। इस मामले में कागजों में केबल बिछा दी गई। यादव सिंह पर आय से अधिक संपत्ति का भी मामला चला। सीबीआई उन पर लगे आरोपों की जांच कर रही है।
