शिवालिक के बाद नंदा देवी भी होर्मुज से निकला, इंडियन नेवी की सुरक्षा में 46,000 मीट्रिक टन LPG लेकर आ रहा भारतीय जहाज
नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में जारी तनाव और अमेरिका-इजरायल युद्ध की आहट के बीच भारत के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है. ईरान द्वारा भारतीय ध्वज वाले टैंकरों को सुरक्षित रास्ता (Safe Passage) देने के आश्वासन के बाद, ‘शिवालिक’ के साथ-साथ अब दूसरा बड़ा एलपीजी टैंकर ‘नंदा देवी’ भी रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को सुरक्षित पार कर चुका है.
ऊर्जा सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण कदम
सरकारी सूत्रों ने शनिवार को पुष्टि की कि ‘नंदा देवी’ 46,000 मीट्रिक टन से अधिक लिक्विड पेट्रोलियम गैस (LPG) लेकर सुरक्षित रूप से खुले समुद्र में पहुंच गया है. इससे पहले ‘शिवालिक’ भी लगभग 40,000 मीट्रिक टन एलपीजी के साथ इस मार्ग को पार कर चुका है. ये दोनों जहाज भारत की ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं. भारतीय नौसेना के युद्धपोत और संपत्ति इन जहाजों को अपनी सुरक्षा घेरे में ले चुके हैं और अगले दो दिनों के भीतर इनके मुंबई या कांडला बंदरगाह पहुंचने की उम्मीद है.
मोदी-पजेशकियन बातचीत का असर
यह सफलता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पजेशकियन के बीच हुई उच्च स्तरीय चर्चा का परिणाम मानी जा रही है. भारत ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर हमेशा ऊर्जा और माल की निर्बाध आवाजाही की वकालत की है. भारत में ईरान के राजदूत मोहम्मद फताली ने शुक्रवार को स्पष्ट किया कि भारत और ईरान के बीच साझा हित और गहरी मित्रता है. उन्होंने कहा, “भारत हमारा मित्र है और हमने युद्ध की इस कठिन स्थिति में भारत की मदद को देखा है, इसलिए भारतीय जहाजों को प्राथमिकता के आधार पर रास्ता दिया गया है.”
समुद्री क्षेत्र में भारत की स्थिति
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण शिपिंग मार्ग है, जहाँ से वैश्विक तेल और गैस निर्यात का लगभग 20% हिस्सा गुजरता है. वर्तमान में फारस की खाड़ी में भारतीय ध्वज वाले 28 जहाज मौजूद हैं. बंदरगाह और शिपिंग मंत्रालय के अनुसार, इनमें से 24 जहाज जलडमरूमध्य के पश्चिम में थे, जिनमें 677 भारतीय नाविक सवार हैं. शेष 4 जहाज पूर्वी हिस्से में हैं.
भारतीय नौसेना और विदेश मंत्रालय इन सभी जहाजों और चालक दल की सुरक्षा पर पैनी नजर रखे हुए हैं. ‘शिवालिक’ और ‘नंदा देवी’ की सुरक्षित वापसी ने यह साबित कर दिया है कि वैश्विक संकट के समय भी भारत की स्वतंत्र विदेश नीति और मजबूत कूटनीति अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा करने में सक्षम है.
