SBI धोखाधड़ी मामले में अनिल अंबानी की रिलायंस टेलीकॉम के खिलाफ CBI का बड़ा एक्शन, कई ठिकानों पर छापेमारी
मुंबई: केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने गुरुवार को मुंबई में रिलायंस टेलीकॉम लिमिटेड और उसके पूर्व निदेशकों के खिलाफ बैंक धोखाधड़ी के एक बड़े मामले में छापेमारी की. यह कार्रवाई भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) की शिकायत पर दर्ज की गई एक नई प्राथमिकी (FIR) के बाद की गई है, जिसमें बैंक को लगभग 114.98 करोड़ रुपये का चूना लगाने का आरोप है.
निदेशकों के आवास और कार्यालय पर दबिश
सीबीआई की टीमों ने सुबह मुंबई स्थित रिलायंस टेलीकॉम के पंजीकृत कार्यालय और कंपनी के तत्कालीन निदेशकों—सतीश सेठ और गौतम बी. दोषी—के निजी आवासों पर तलाशी ली. अधिकारियों के अनुसार, घंटों चली इस तलाशी के दौरान ऋण लेनदेन, वित्तीय विवरणों और आंतरिक पत्राचार से जुड़े कई महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद किए गए हैं. जांच एजेंसी अब इन दस्तावेजों की बारीकी से जांच कर रही है ताकि धन के हेरफेर के सुराग मिल सकें.
क्या है पूरा मामला?
एसबीआई द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के अनुसार, रिलायंस टेलीकॉम लिमिटेड 11 बैंकों के एक कंसोर्टियम (समूह) का हिस्सा थी, जिसने कंपनी को कुल 735 करोड़ रुपये की सावधि ऋण सुविधा स्वीकृत की थी. आरोप है कि आरोपियों ने आपराधिक साजिश रचते हुए बैंक के साथ धोखाधड़ी की और ऋण राशि का दुरुपयोग किया. सीबीआई ने इस मामले में भारतीय दंड संहिता (IPC) की धाराओं के तहत आपराधिक साजिश और धोखाधड़ी के साथ-साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं के तहत लोक सेवकों द्वारा पद के दुरुपयोग और आपराधिक कदाचार का मामला दर्ज किया है.
अनिल अंबानी समूह पर बढ़ता शिकंजा
यह कार्रवाई रिलायंस समूह (अनिल अंबानी नेतृत्व) से जुड़ी कंपनियों के खिलाफ चल रही जांच की एक कड़ी है. गौर करने वाली बात यह है कि इसी महीने की शुरुआत में सीबीआई ने रिलायंस कम्युनिकेशंस (RCom) से जुड़े 2,929 करोड़ रुपये के एक अन्य धोखाधड़ी मामले में अनिल अंबानी से करीब आठ घंटे तक पूछताछ की थी. इसके अलावा, फरवरी में बैंक ऑफ बड़ौदा की शिकायत पर आरकॉम के खिलाफ 2,220 करोड़ रुपये का एक और मामला दर्ज किया गया था.
अधिकारियों का कहना है कि बरामद दस्तावेजों के आधार पर जल्द ही कंपनी के अन्य अधिकारियों और संबंधित लोक सेवकों को पूछताछ के लिए बुलाया जा सकता है. बैंक खातों को पहले ही ‘फ्रॉड’ (धोखाधड़ी) घोषित किया जा चुका है. सीबीआई अब इस बात की जांच कर रही है कि क्या ऋण की राशि को अन्य शेल कंपनियों या विदेशी खातों में डायवर्ट किया गया था.
