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सुल्तानपुर और भिंडावास सहित 1800 से अधिक वेटलैंड का सीमांकन और मैपिंग की जाएगी

चंडीगढ़। हरियाणा में वेटलैंड (आर्द्रभूमि) के संरक्षण के लिए प्रदेश सरकार ने राज्य स्तरीय प्राधिकरण का पुनर्गठन किया है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी खुद चेयरमैन के रूप में इसकी कमान संभालेंगे। पर्यावरण, वन एवं वन्य प्राणी विभाग के मंत्री राब नरबीर को सीनियर वाइस चेयरमैन बनाने के साथ ही हांसी के विधायक विनोद भयाना ओर पूंडरी के विधायक सतपाल जांबा को इस प्राधिकरण में रखा गया है।

मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी वाइस चेयरमैन होंगे। विभिन्न विभागों से जुड़े करीब एक दर्जन आइएएस अधिकारियों को प्राधिकरण में जगह मिली है। यह प्राधिकरण प्रदेश की सभी आर्द्रभूमियों की सूची तैयार करेगा। रिमोट सेंसिंग और ग्राउंड ट्रूथिंग का उपयोग कर आर्द्रभूमि की सीमाओं का सीमांकन और भूमि उपयोग मानचित्र तैयार करना इसकी जिम्मेदारी होगी।

हरियाणा में सुल्तानपुर राष्ट्रीय उद्यान (गुरुग्राम) और भिंडावास वन्यजीव अभयारण्य (झज्जर) प्रमुख वेटलैंड हैं, जिन्हें अंतरराष्ट्रीय रामसर साइट का दर्जा प्राप्त है। राज्य में 1800 से अधिक छोटी-बड़ी आर्द्रभूमियां हैं, जिनमें बसई वेटलैंड, कोटला झील और नजफगढ़ ड्रेन के पास के क्षेत्र शामिल हैं, जो प्रवासी पक्षियों के लिए महत्वपूर्ण हैं। रेवाड़ी के मसानी बैराज को आधिकारिक तौर पर वेटलैंड घोषित कराने के लिए स्थानीय ग्रामीणों ने अभियान चलाया हुआ है।

केंद्र सरकार की राष्ट्रीय आर्द्रभूमि संरक्षण योजना के तहत आर्द्रभूमियों की पहचान, मैपिंग और संरक्षण का प्रविधान यानि नष्ट होने से रोकने और लंबे समय तक सुरक्षित रखने की तैयारी करना है। इसी कड़ी में हरियाणा में पर्यावरण, वन और वन्यजीव विभाग ने तकनीक के माध्यम से सभी जिलों की आर्द्रभूमियों का नक्शा तैयार किया है।

इससे अतिक्रमण रोकने और संरक्षण की दिशा में योजना बनाई जाएगी। प्रदेश सरकार ने न्यायालय के निर्देश पर राज्य में चिह्नित 1881 आर्द्रभूमियों का स्थलीय सत्यापन और डिजिटल सीमांकन पूरा करने के लिए सभी उपायुक्तों को आदेश दिए हैं।

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