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बीच समंदर में क्‍या हुआ? भारत आ रहा ईरानी तेल से भरा जहाज चीन की ओर मुड़ा!

नई दिल्ली: अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार और कूटनीतिक गलियारों से एक बड़ी खबर सामने आ रही है. अमेरिकी प्रतिबंधों की जद में आने वाला और ईरानी कच्चा तेल लेकर भारत की ओर बढ़ रहा टैंकर ‘पिंग शून’ बीच रास्ते में अपना रास्ता बदलकर अब चीन की ओर बढ़ गया है. शिप-ट्रैकिंग फर्म ‘केपलर’ के अनुसार, इस अफ्रामैक्स टैंकर ने अपने गंतव्य की सूची से भारत के गुजरात स्थित वादीनार बंदरगाह को हटा दिया है और अब यह चीन के डोंगयिंग बंदरगाह की ओर संकेत दे रहा है.

2019 के बाद होने वाली थी पहली खेप

अगर यह खेप भारत पहुंचती, तो यह साल 2019 के बाद ईरान से कच्चे तेल की पहली खरीद होती. साल 2018 में अमेरिकी प्रतिबंधों के कड़े होने के बाद, भारत ने मई 2019 से ईरानी तेल का आयात बंद कर दिया था. हाल ही में अमेरिका द्वारा ईरानी तेल पर दी गई 30 दिनों की अस्थायी छूट के बाद भारतीय रिफाइनरियों ने समुद्र में मौजूद ईरानी तेल को खरीदने की संभावनाएं तलाशनी शुरू की थीं. ‘पिंग शून’ जहाज करीब 6 लाख बैरल कच्चा तेल लेकर 4 अप्रैल को वादीनार पहुंचने वाला था.

क्यों बदला रास्ता?

केपलर के रिफाइनिंग और मॉडलिंग विभाग के प्रमुख विश्लेषक सुमित रितोलिया के अनुसार, इस बदलाव का मुख्य कारण ‘भुगतान की शर्तें’ हो सकती हैं. आमतौर पर तेल व्यापार में 30 से 60 दिनों की क्रेडिट अवधि मिलती है, लेकिन वर्तमान अनिश्चितता को देखते हुए विक्रेता अब तत्काल या अग्रिम भुगतान की मांग कर रहे हैं.

चूंकि ईरान वैश्विक बैंकिंग संदेश प्रणाली ‘स्विफ्ट’ से बाहर है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भुगतान करना एक बड़ी चुनौती बना हुआ है. पहले भारत तुर्की के एक बैंक के माध्यम से यूरो में भुगतान करता था, लेकिन अब वह विकल्प भी उपलब्ध नहीं है. विशेषज्ञों का मानना है कि वित्तीय जोखिम और व्यापारिक शर्तें अब लॉजिस्टिक्स जितनी ही महत्वपूर्ण हो गई हैं.

भारत के लिए क्या हैं मायने?

वादीनार में रूसी तेल कंपनी रोसनेफ्ट समर्थित ‘नायरा एनर्जी’ की विशाल रिफाइनरी स्थित है. भारत ऐतिहासिक रूप से ईरानी तेल का बड़ा खरीदार रहा है क्योंकि ईरानी तेल (ईरान लाइट और ईरान हैवी) भारतीय रिफाइनरियों के अनुकूल है और व्यावसायिक रूप से भी किफायती पड़ता है. 2018 में भारत अपनी जरूरत का लगभग 11.5 प्रतिशत तेल ईरान से लेता था.

वर्तमान में, अमेरिका द्वारा दी गई 30 दिनों की छूट 19 अप्रैल को समाप्त हो रही है. अनुमान है कि समुद्र में विभिन्न जहाजों पर करीब 9.5 करोड़ बैरल ईरानी तेल मौजूद है, जिसमें से लगभग 5.1 करोड़ बैरल भारत के लिए उपयुक्त हो सकता है.

हालांकि जहाज के ऑटोमैटिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम (AIS) में दर्ज गंतव्य अंतिम नहीं होता और इसमें फिर से बदलाव संभव है. यदि भुगतान संबंधी जटिलताएं हल हो जाती हैं, तो यह खेप अभी भी भारतीय रिफाइनरी तक पहुंच सकती है. फिलहाल, भारत का पेट्रोलियम मंत्रालय तकनीकी और व्यावसायिक व्यवहार्यता के आधार पर ही ईरानी तेल खरीद पर कोई भी अंतिम निर्णय लेने की बात कह रहा है.

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