नोएडा-ग्रेटर नोएडा में LPG की किल्लत, 20% तक गिरा उत्पादन, मजदूरों पर संकट
नोएडा: उत्तर प्रदेश के नोएडा और ग्रेटर नोएडा में घरेलू और कमर्शल एलपीजी गैस की भारी किल्लत ने न केवल आम आदमी की रसोई को प्रभावित किया है, बल्कि औद्योगिक रफ्तार पर भी ब्रेक लगा दिया है। स्थिति इतनी विकट हो चुकी है कि उद्योगों में उत्पादन 20 प्रतिशत तक गिर गया है और दो वक्त की रोटी के लिए तरस रहे कामगार अब मजबूरी में पलायन कर अपने गांवों की ओर लौटने लगे हैं।
नोएडा में गैस संकट की सबसे बड़ी मार उन लाखों दिहाड़ी मजदूरों और कामगारों पर पड़ी है, जो बिल्डर साइटों, गारमेंट इकाइयों और एक्सपोर्ट कंपनियों में कार्यरत हैं। इन कामगारों के पास कोई स्थायी गैस कनेक्शन नहीं है। ये लोग छोटे 5 किलो वाले सिलेंडरों और पेट्रोमेक्स में गैस रिफिल कराकर अपना गुजारा करते थे। अब बाजार में गैस उपलब्ध नहीं है। और जहां मिल भी रही है, वहां मनमाने दाम वसूले जा रहे हैं।
ईरान-इजराइल संघर्ष के कारण लोहा, तांबा, प्लास्टिक और कागज जैसे कच्चे माल की कीमतों में 50 प्रतिशत तक की वृद्धि हुई है। उत्पादन लागत बढ़ने और ऊर्जा संकट के कारण कई छोटी यूनिट्स बंद हो गई हैं। किराया, बैंक लोन की किश्तें और कर्मचारियों का वेतन देना अब फैक्ट्री मालिकों के लिए नामुमकिन होता जा रहा है।
ग्रेटर नोएडा IBA के अध्यक्ष अमित उपाध्याय
सुबह 6 बजे से गैस एजेंसी पर लग जा रही कतारभोजन पकाने का साधन न होने और बाहर रेहड़ी-पटरी पर मिलने वाले खाने के सीमित हो जाने से मजदूरों के सामने भुखमरी की नौबत आ गई है। शहर की गैस एजेंसियों पर सुबह 6 बजे से ही उपभोक्ताओं की लंबी कतारें लग रही हैं, लेकिन घंटों इंतजार के बाद भी अधिकांश लोग खाली हाथ लौट रहे है।
विशेष राहत पैकेज की मांग
औद्योगिक क्षेत्रों में स्थित कैंटीन और छोटे होटल बंद होने से श्रमिकों की दैनिक जरूरतें प्रभावित हो रही है। उद्यमियों और संगठनों ने जिला प्रशासन और सरकार से मांग की है कि पीएनजी कनेक्शन की प्रक्रिया को फास्ट-ट्रैक किया जाए और प्रभावित उद्योगों के लिए विशेष राहत पैकेज की घोषणा की जाए, ताकि पलायन को रोका जा सके।
कच्चे माल की कीमतें बढ़ने से 20% तक गिरा उत्पादन
- नोएडा एंटरप्रेन्योर एसोसिएशन (NEA) के उपाध्यक्ष सुधीर श्रीवास्तव ने बताया कि कामगारों का शहर छोड़ना उद्योगों के लिए खतरे की घंटी है। कई इकाइयों में उत्पादन 15 से 20 प्रतिशत तक घट चुका है। वहीं, हैंडलूम हैंडीक्राफ्ट एक्सपोर्टर्स वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष सीपी शर्मा ने चिंता जताते हुए कहा कि यदि कामगारों का पलायन इसी तरह जारी रहा, तो पूरी उत्पादन व्यवस्था चरमरा जाएगी और अंतरराष्ट्रीय निर्यात आर्डर समय पर पूरे नहीं हो सकेंगे।
- ग्रेटर नोएडा के सूक्ष्म एवं लघु उद्योगों (MSMB) की स्थिति और भी खराब है। एलपीजी कमर्शियल सिलेंडर की सप्लाई ठप होने से कई उद्यमी पीएनजी (PNG) की ओर रुख कर रहे हैं, लेकिन यहां भी राहत नहीं है। नए पीएनजी कनेक्शन के लिए लाखों रुपये का खर्च और करीब 10 महीने का वेटिंग पीरियड उद्यमियों की कमर तोड़ रहा है।
