3900 मीटर रनवे से 7 करोड़ यात्रियों तक—नोएडा एयरपोर्ट की बड़ी खूबियां
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 28 मार्च को नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का उद्घाटन करेंगे। एयरपोर्ट शुरू हो जाने के बाद दिल्ली-एनसीआर के लोगों को काफी सहुलियत मिलेगी। दिल्ली एयरपोर्ट के अलावा एनसीआर में एक और एयरपोर्ट का विकल्प मिलेगा। नोएडा एयरपोर्ट में कई ऐसी चीजें हैं जो इसे खास बनाती है।
पीआईबी द्वारा जारी एक आधिकारिक प्रेस रिलीज में कहा गया है कि पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल के तहत लगभग 11,200 करोड़ रुपये के निवेश से विकसित इस एयरपोर्ट को एनसीआर के लिए एक प्रमुख इंटरनेशनल गेटवे के रूप में स्थापित किया जा रहा है। निर्माण के पहले चरण के तहत एयरपोर्ट सालाना 1.2 करोड़ यात्रियों को संभालने में सक्षम होगा मगर जैसे-जैसे काम आगे बढ़ेगा यह यह क्षमता बढ़कर 7 करोड़ यात्री सालाना तक पहुंच जाएगी।
रनवे कितना लंबा?
एयरपोर्ट का रनवे 3900 मीटर लंबा है। रनवे पर बड़े जहाज भी लैंडिंग कर सकते हैं। रनवे पर मॉर्डन नेविगेशन सिस्टम जैसे इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम और बेहतरीन लाइटिंग व्यवस्था है जिससे दिन-रात हर तरह के मौसम में इसपर सुरक्षित लैंडिग की जा सकती है।
कार्गो और एमआरओ
एयरपोर्ट में मल्टी मोडल कार्गो (सामान ले जाने की सुविधा) के साथ लॉजिस्टिक्स जोन की सुविधा है। इन्हें सालाना 2.5 लाख मीट्रिक टन से ज्यादा कार्गो संभालने के लिए डिजाइन किया गया है और इसकी क्षमता को लगभग 18 लाख मीट्रिक टन तक बढ़ाया जा सकता है। यहां 40 एकड़ में एमआरओ (हवाई जहाजों के रिपेयर की सुविधा) भी है। वहीं एयरपोर्ट की बनावट में भारतीय विरासत की झलक दिखती है, जिसमें घाटों और हवेलियों जैसे डिजाइन शामिल किए गए हैं।
एयरपोर्ट के साइज को लेकर हाल में गौतम बुद्ध नगर के सांसद महेश शर्मा ने कहा था कि दिल्ली के एयरपोर्ट से यह लगभग ढाई गुना बढ़ा है तो वहीं मुंबई के एयरपोर्ट से यह लगभग तीन गुना बढ़ा है।
चप्पे-चप्पे पर पहरा
उद्घाटन के लिए गौतमबुद्ध नगर जिला प्रशासन पूरी तैयारी में जुटा हुआ है। एक हाई लेवल बैठक में सुरक्षा व्यवस्था, ट्रैफिक और पार्किंग को लेकर विशेष निर्देश दिए गए हैं। उद्घाटन समारोह से पहले जेवर क्षेत्र में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। पुलिस आयुक्त के निर्देश पर सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए पांच अस्थायी जांच चौकियां बनाई गई हैं, जिनमें तीन चौकियां हवाई अड्डा परिसर के भीतर और दो एक्सप्रेसवे और आसपास के क्षेत्रों की निगरानी के लिए बनाई गई हैं।
