Rapid24news

Har Khabar Aap Tak

स्विगी से खाना ऑर्डर करना हुआ महंगा, बढ़ाई प्लेटफॉर्म फीस; जोमैटो के मुकाबले कितनी?

नई दिल्ली: ऑनलाइन फूड डिलीवरी की दुनिया के दो सबसे बड़े दिग्गजों, स्विगी और ज़ोमैटो ने एक बार फिर ग्राहकों की जेब पर बोझ बढ़ा दिया है. ज़ोमैटो द्वारा हाल ही में शुल्क बढ़ाने के बाद, अब स्विगी ने भी अपने प्लेटफॉर्म शुल्क में लगभग 17 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी की घोषणा की है.

शुल्क में 17% की वृद्धि

ताजा अपडेट के अनुसार, स्विगी का प्लेटफॉर्म शुल्क अब ₹14.99 से बढ़कर ₹17.58 प्रति ऑर्डर (GST सहित) हो गया है. सीधे तौर पर देखें तो ग्राहकों को अब हर ऑर्डर पर लगभग ₹2.59 अतिरिक्त चुकाने होंगे. कंपनी ने ऐप पर बिलिंग विवरण के माध्यम से उपयोगकर्ताओं को सूचित किया है कि इस वृद्धि का उद्देश्य “प्लेटफॉर्म के संचालन और रखरखाव” को बेहतर बनाना है.

ज़ोमैटो के नक्शेकदम पर स्विगी

दिलचस्प बात यह है कि स्विगी का यह कदम ज़ोमैटो द्वारा पिछले सप्ताह की गई वृद्धि के ठीक बाद आया है. ज़ोमैटो ने भी अपने प्लेटफॉर्म शुल्क में 19 प्रतिशत की बढ़ोतरी की थी, जिससे उसका प्रभावी शुल्क भी जीएसटी मिलाकर ₹17.58 हो गया है. अब दोनों प्रतिद्वंद्वी कंपनियां लगभग समान शुल्क वसूल रही हैं. गौरतलब है कि अगस्त 2023 में जब यह शुल्क शुरू किया गया था, तब यह मात्र ₹2 प्रति ऑर्डर था, जो महज दो-तीन वर्षों में कई गुना बढ़ चुका है.

क्यों बढ़ रहे हैं दाम?

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि फूड डिलीवरी इकोसिस्टम में परिचालन लागत लगातार बढ़ रही है. एलपीजी, कच्चे तेल की कीमतों और लॉजिस्टिक्स खर्चों में वृद्धि ने न केवल रेस्तरां बल्कि डिलीवरी पार्टनर्स की लागत को भी प्रभावित किया है. अपनी लाभप्रदता को बनाए रखने और मार्जिन सुधारने के लिए कंपनियां ग्राहकों पर यह बोझ डाल रही हैं.

शेयर बाजार और निवेशकों का रुख

इस घोषणा के बाद शेयर बाजार में मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिली. जहाँ ज़ोमैटो की पैरेंट कंपनी ‘इटर्नल’ के शेयरों में करीब 2 प्रतिशत की बढ़त देखी गई, वहीं स्विगी के शेयर ₹273.40 के स्तर पर सपाट कारोबार करते नजर आए. पिछले छह महीनों में स्विगी के शेयरों में लगभग 40 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है, जो निवेशकों की चिंता को दर्शाता है.

प्लेटफॉर्म शुल्क में यह निरंतर वृद्धि उन ग्राहकों के लिए चिंता का विषय है जो नियमित रूप से बाहर से खाना मंगवाते हैं. हालांकि कंपनियाँ इसे ‘मेंटेनेंस फीस’ कह रही हैं, लेकिन छोटे ऑर्डर्स पर यह अतिरिक्त शुल्क अब काफी अधिक लगने लगा है. आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या मैजिकपिन जैसे अन्य प्रतिस्पर्धी भी इसी राह पर चलते हैं या कम शुल्क के साथ ग्राहकों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

WhatsApp