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चीन में भारत के नए राजदूत बने विक्रम दोरईस्वामी, सामने होगी ये बड़ी चुनौती

बीजिंग : चीन में भारत के नए राजदूत नियुक्त किए गए वरिष्ठ राजनयिक विक्रम दुरईस्वामी के नाम को लेकर पड़ोसी देश में काफी उत्सुकता दिखायी जा रही है और बीजिंग के एक अधिकारी ने इसे चीनी नाम ‘वेई जियामेंग’ से जोड़ा है.

भारतीय विदेश सेवा (आईएफएस) के 1992 बैच के अधिकारी दुरईस्वामी वर्तमान में ब्रिटेन में भारतीय उच्चायुक्त के रूप में कार्यरत हैं. चीन में उनके जल्द ही नया कार्यभार संभालने की उम्मीद है.

दुरईस्वामी की नियुक्ति पर चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने एक प्रेसवार्ता में कहा, ‘‘मैंने देखा कि राजदूत दुरईस्वामी ने अपना चीनी नाम चुना है: वेई जियामेंग.’’

चीनी विद्वानों के अनुसार, मंदारिन में इस नाम का सामान्य अनुवाद ‘वेई’ है, जो एक आम चीनी उपनाम है और जिसका उच्चारण विक्रम के ‘वी’ से मिलता-जुलता है. बहुत पहले, चीनी इतिहास में वेई एक शक्तिशाली राज्य था.

विद्वानों ने पीटीआई से कहा कि ‘जिया’ का अर्थ ‘‘शुभ या प्रशंसनीय’’ है, और ‘मेंग’ का अर्थ ‘‘सहयोगी’’ है. उन्होंने कहा कि व्यापक अर्थ में इसका अर्थ शुभ/प्रशंसनीय सहयोगी है.

चीन के एक विद्वान के अनुसार, इन सभी बातों को मिलाकर इसे ‘‘एक उत्कृष्ट गठबंधन बनाने वाला’’ कहा जा सकता है, जिसका भारत-चीन संबंधों के वर्तमान संदर्भ में कूटनीतिक महत्व है.

दुरईस्वामी की नियुक्ति ने चीनी आधिकारिक मीडिया और चीनी रणनीतिक समुदाय में काफी दिलचस्पी पैदा की है.

वह मंदारिन भाषा के जानकार हैं. उन्होंने अपने प्रारंभिक राजनयिक करियर में हांगकांग और बीजिंग दोनों के राजनयिक मिशन में सेवा की. उन्होंने अपने प्रारंभिक करियर में हांगकांग में तृतीय सचिव के रूप में कार्य किया, जहां उन्होंने न्यू एशिया येल-इन-एशिया भाषा स्कूल से चीनी भाषा में एक वैकल्पिक डिप्लोमा प्राप्त किया, और फिर सितंबर 1996 में चार साल के कार्यकाल के लिए बीजिंग चले गए.

चीन की सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी के पीपुल्स डेली प्रकाशन समूह का हिस्सा ‘ग्लोबल टाइम्स’ ने उनकी नियुक्ति की खबर पहले पृष्ठ पर, ‘‘भारत ने अनुभवी चीन विशेषज्ञ को अगला राजदूत नियुक्त किया’’ शीर्षक से प्रकाशित की है.

फुदान विश्वविद्यालय के दक्षिण एशियाई अध्ययन केंद्र के उपनिदेशक लिन मिनवांग ने ग्लोबल टाइम्स से कहा, ‘‘चीन में राजदूत का पद भारत की राजनयिक सेवा में सबसे महत्वपूर्ण पदों में से एक माना जाता है… चीन में दुरईस्वामी के कार्यकाल ने उन्हें देश की अधिक तर्कसंगत और व्यापक समझ प्रदान की है.’’

त्सिंगहुआ विश्वविद्यालय के राष्ट्रीय रणनीति संस्थान के अनुसंधान विभाग के निदेशक कियान फेंग ने दैनिक समाचार पत्र से कहा कि दुरईस्वामी भारत के वरिष्ठ राजनयिकों में एक दिग्गज ‘‘चीन विशेषज्ञ’’ हैं, जिनके पास चीन-भारत संबंधों और चीन की राष्ट्रीय परिस्थितियों की गहरी समझ है.

उनके अनुसार, यह नवीनतम नियुक्ति बीजिंग के साथ संबंधों को नयी दिल्ली द्वारा दिए जाने वाले महत्व को रेखांकित करती है, और संबंधों को स्थिर करने एवं आगे बढ़ाने में व्यावसायिकता और व्यावहारिकता दोनों पर मजबूत जोर को दर्शाती है, जो एक सकारात्मक संकेत है.

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