युवराज मेहता केस: एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और स्थानीय प्रशासन पर हाई कोर्ट का कड़ा सवाल
नोएडा: उत्तर प्रदेश में नोएडा के सेक्टर-150 में सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत के मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने कहा कि यदि समय पर राहत मिलती तो युवराज की जान बचाई जा सकती थी, लेकिन सिस्टम की लापरवाही और बचाव में देरी घातक साबित हुई। कोर्ट ने मामले में सभी संबंधित एजेंसियों से जवाब मांगा है। इस मामले की अगली सुनवाई शुक्रवार को होगी।
कोर्ट ने उठाए सवाल
हाई कोर्ट ने एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की भूमिका पर सवाल उठाए और जानना चाहा कि हादसे के समय मौके पर जिम्मेदार अधिकारी क्यों मौजूद नहीं थे। कोर्ट ने सभी एजेंसियों को निर्देश दिए कि वे जल्द जवाब दाखिल करें। साथ ही कोर्ट ने स्थानीय प्रशासन और नोएडा प्राधिकरण की कार्यप्रणाली पर भी टिप्पणी की।
बचाव कार्य में हुई चूक
जांच में सामने आया कि कई स्तरों पर गंभीर चूक हुई, जिसके कारण राहत और बचाव कार्य समय पर नहीं हो सके। कोर्ट ने पूछा कि आखिर ऐसी क्या वजह रही कि घंटों तक मदद की गुहार लगाने के बावजूद युवराज को बचाया नहीं जा सका। कोर्ट ने यह भी देखा कि बचाव टीमों को ऐसी परिस्थितियों के लिए क्या ट्रेनिंग दी गई थी और मौके पर कौन अधिकारी मौजूद थे।
हादसे का मामला
27 वर्षीय युवराज मेहता जनवरी में एक बिल्डर के प्लॉट में भरे पानी में गिर गए थे। उन्होंने काफी समय तक मदद के लिए पुकारा, लेकिन समय पर उन्हें बाहर नहीं निकाला जा सका। इस मामले में हिमांशु जायसवाल ने हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की थी।
प्रशासन और पुलिस की कार्रवाई
नोएडा सेक्टर-150 में हुए हादसे के बाद दादरी विधायक तेजपाल नागर ने बताया कि प्रशासन और अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जा चुकी है। नोएडा अथॉरिटी के सीईओ से लेकर पुलिस के डीसीपी तक जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई हुई। जूनियर इंजीनियर, लंबे समय से प्रोजेक्ट इंजीनियर और डीजीएम को उनके पद से हटा दिया गया। पुलिस जांच अभी भी जारी है और SIT रिपोर्ट आने के बाद आवश्यकतानुसार और कार्रवाई की जाएगी।
