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ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण का बड़ा अभियान, अधिग्रहित जमीन पर कब्जों की होगी जांच

ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने हैबतपुर, मिलक लच्छी और भनौता सहित 14 गांवों में अधिग्रहित जमीन को सुरक्षित करने के लिए एक बड़ा सर्वेक्षण शुरू किया है। इसके लिए विशेष टीमें गठित की गई हैं जो 15 दिनों में अपनी रिपोर्ट सौंपेंगी। इस अभियान का उद्देश्य खाली जमीन की पहचान कर वहां तारबंदी करना और अवैध कब्जों को हटाना है। प्राधिकरण अब अतिक्रमण रोकने के लिए इसरो की मदद से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित मॉनिटरिंग सिस्टम भी तैयार कर रहा है। अधिकारियों की ओर से इस काम की रोजाना समीक्षा की जाएगी।

टीमों ने शुरू किया सर्वे

अधिकारी के मुताबिक टीम में नायब तहसीलदार, सहायक चकबंदी अधिकारी, संबंधित वर्क सर्किल के प्रभारी वरिष्ठ प्रबंधक और प्रबंधक समेत अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों को शामिल किया गया है। टीमों ने मंगलवार से सर्वेक्षण करना शुरू कर दिया। टीम के सदस्य मौके पर जाकर देखेंगे कि अधिग्रहीत जमीन मौके पर खाली है या अतिक्रमण हो रखा है।

15 दिन में देनी होगी रिपोर्ट

खसरा संख्या समेत इसकी विस्तृत रिपोर्ट 15 दिन के अंदर उच्चाधिकारियों को देनी होगी। योजना के मुताबिक जमीन खाली मिलने पर उसकी तारबंदी कराई जाएगी। वहीं, अतिक्रमण होने पर उसे ध्वस्त करने की कार्रवाई की जाएगी।

अधिसूचित क्षेत्र के सभी गांवों में होगा सर्वे

चरणबद्ध तरीके से अधिसूचित क्षेत्र के सभी गांवों में सर्वेक्षण किया जाएगा। इससे जमीन का डाटा भी तैयार हो जाएगा कि अभी कितनी जमीन खाली है। दरअसल प्राधिकरण के अधिसूचित क्षेत्र के गांवों में अतिक्रमण की बढ़ती समस्या को देखते हुए सीईओ रवि कुमार एनजी ने संबंधित विभाग के अधिकारियों को इस पर अंकुश लगाने के निर्देश दिए हैं। इस कारण अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी गई है।

इन गांवों में सर्वेक्षण हो रहा

प्रथम चरण में ग्रेटर नोएडा वेस्ट के हैबतपुर, मिलक लच्छी, भनौता, जुनपत, तिलपता, तुगलपुर, सादुल्लापुर, बिसरख जलालपुर, खैरपुर गुर्जर, खेड़ा चौगानपुर, पतवारी, मलकपुर, बिरौंडी चक्रसेनपुर, साकीपुर, अजायबपुर आदि गांव शामिल हैं।

हर रोज समीक्षा होगी

अधिग्रहित की गई जमीन को चिह्नित करने के लिए गठित की गई टीम के कार्यों की हर रोज समीक्षा की जाएगी। इसकी जिम्मेदारी नामित अधिकारी को सौंपी गई है। एसीईओ को साप्ताहिक प्रगति रिपोर्ट से अवगत कराया जाएगा। प्रथम चरण के बाद दूसरे चरण के गांवों की सूची तैयार की जाएगी।

अतिक्रमण रोकने के लिए कवायद

प्राधिकरण अतिक्रमण की पहचान करने के लिए एआई की भी मदद लेगा। इसके लिए भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के नेशनल रिमोट सेंसिंग सेंटर (एनआरएससी) के साथ मिलकर अतिक्रमण मॉनिटरिंग सिस्टम विकसित किया जाएगा। प्राधिकरण और एनआरएससी के बीच समझौता हो चुका है।

एआई की मदद से अतिक्रमण की होगी पहचान

एआई की मदद से अतिक्रमण की पहचान की जाएगी। इस प्रणाली के जरिए अधिकारियों को अधिसूचित क्षेत्र की वास्तविक जानकारी मिल सकेगी।

ग्रामवार टीम गठित

ग्रेटर नोएडा एसीईओ सुमित यादव ने बताया कि सीईओ के निर्देश पर अधिग्रहित जमीन को चिह्नित करने के लिए ग्रामवार टीम गठित की गई है। सर्वेक्षण में खाली मिली जमीन की तारबंदी कराई जाएगी। अतिक्रमण मिलने पर उसे हटाने की कार्रवाई की जाएगी।

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