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हर मिशन में मिलेगी बढ़त!, FPV ड्रोन से लैस होगी भारतीय सेना

भारतीय सेना जल्द ही पैदल सेना (इन्फैंट्री) के संचालन में एक बड़ा बदलाव करने जा रही है। सेना ने फैसला किया है कि हर इन्फैंट्री बटालियन में एक अलग FPV ड्रोन प्लाटून (First Person View Drone Platoon) बनाया जाएगा। इसका उद्देश्य जमीनी युद्ध क्षमता को और अधिक आधुनिक बनाना है।

 क्या होता है FPV ड्रोन?

FPV ड्रोन वो ड्रोन होते हैं जिन्हें सैनिक रियल-टाइम वीडियो फीड के ज़रिए नियंत्रित करते हैं। यानी ड्रोन जिस जगह उड़ रहा होता है, उसका लाइव वीडियो ऑपरेटर की आंखों के सामने होता है, जिससे ऐसा लगता है जैसे वह खुद उस जगह मौजूद हो।

इस पहल का उद्देश्य क्या है?

भारतीय सेना बदलते युद्ध के तरीकों को देखते हुए अपनी रणनीति को और आधुनिक बना रही है। आज के समय में ड्रोन टेक्नोलॉजी युद्ध में बेहद असरदार साबित हो रही है, जैसे कि यूक्रेन-रूस युद्ध में देखने को मिला। FPV ड्रोन का इस्तेमाल:

  • दुश्मन की सही स्थिति जानने के लिए (Live Surveillance)
  • सीमाओं पर निगरानी रखने के लिए
  • बम या छोटे विस्फोटक ले जाकर टारगेट पर सटीक हमला करने के लिए (Precision Strike)
  • बारूदी सुरंगों (IEDs) या घात लगाकर बैठे दुश्मनों का पता लगाने के लिए

एक FPV प्लाटून में कौन-कौन होंगे?

हर FPV प्लाटून में 20-30 जवानों की टीम होगी, जिसमें शामिल होंगे:

  • ड्रोन उड़ाने वाले सैनिक (Drone Pilots)
  • तकनीकी एक्सपर्ट्स (Technicians)
  • डेटा विश्लेषक (Analysts)

ये प्लाटून पहले से मौजूद घातक प्लाटून जैसी यूनिटों के साथ मिलकर काम करेंगे, जो विशेष ऑपरेशन में तैनात होती हैं।

 कितनी यूनिट्स होंगी?

भारतीय सेना की करीब 350 इन्फैंट्री बटालियन हैं। हर बटालियन में एक FPV ड्रोन यूनिट तैनात की जाएगी, यानी कुल सैकड़ों ड्रोन यूनिट्स तैयार की जाएंगी।

 क्या होंगे फायदे?

  • सैनिकों की सुरक्षा: दूर से ही दुश्मन पर नजर रखी जा सकेगी, फिजिकल रिस्क कम होगा।
  • कम लागत: ये ड्रोन सस्ते होते हैं लेकिन बहुत असरदार होते हैं।
  • आत्मनिर्भर भारत: अधिकतर ड्रोन देश में ही तैयार किए जा रहे हैं, जिससे विदेशी निर्भरता कम होगी।
  • बॉर्डर सिक्योरिटी में मदद: चीन और पाकिस्तान से लगी सीमाओं पर निगरानी और स्ट्राइक में तेजी आएगी।

NEWS SOURCE Credit :punjabkesari

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