कचरा प्रबंधन में लापरवाही पड़ी भारी, कंपनी पर 10.38 लाख का दंड
नोएडा। प्राधिकरण ने डोर टू डोर कचरा संग्रहण का कार्य संभाल रही कंपनी एमएस एजी एनवायरो इंफ्रा प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड पर 10,38,290 रुपये का दंड लगाया है। यह कार्रवाई 25 मार्च से 31 मार्च के बीच कचरा उठाने में पाई गई गंभीर खामियों के आधार पर की गई है। बता दें कि
इस प्रकरण को लेकर दैनिक जागरण ने पिछले दिनों प्रमुखता से खबर प्रकाशित की थी, जिसके बाद सेक्टर-27 में डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण में लापरवाही और ओवरलोड कचरा वाहनों के मामले में सुपरवाइजर को निलंबित किया गया।
ड्राइवर को नोटिस जारी हुआ था, अब नोएडा प्राधिकरण ने कूड़ा उठाने वाली कंपनी पर भारी जुर्माना ठोक दिया है, क्योंकि कंपनी अनुबंध की शर्तों के अनुसार काम नहीं कर रही थी।
कई सेक्टरों और गांवों का कूड़ा समय पर नहीं उठा
कई सेक्टरों और गांवों में कूड़ा समय पर नहीं उठाया गया, जिससे जगह-जगह कूड़े के ढेर लग गए ओवर लोडेड गाड़ी होती हैं और लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
रिपोर्ट के अनुसार कचरा संग्रहण के लिए तैनात 157 प्राथमिक वाहन निर्धारित क्षेत्रों में ड्यूटी पर नहीं पहुंचे। इस लापरवाही के लिए प्रति वाहन 2500 रुपये की दर से 3,92,500 रुपये का जुर्माना लगाया गया।
वहीं, 1,29,158 घरों से कूड़ा नहीं उठाया गया, जिस पर प्रति घर 5 रुपये की दर से 6,45,790 रुपये का दंड लगाया गया। दोनों मदों को मिलाकर कुल जुर्माना 10,38,290 रुपये निर्धारित किया गया है। जांच में यह भी पाया गया कि कंपनी के करीब 25 प्रतिशत वाहन खराब हालत में थे, जिनकी समय पर मरम्मत नहीं कराई गई।
अतिरिक्त वाहनों की व्यवस्था भी नहीं की गई, जिससे कचरा संग्रहण व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हुई। कई इलाकों में गाड़ियां नियमित रूप से नहीं पहुंचीं, जिसके कारण लोगों ने सड़कों और खाली स्थानों पर कूड़ा फेंकना शुरू कर दिया।
पहले भी कई बार दी गई थी चेतावनी
स्थानीय निवासियों ने इस कार्रवाई का स्वागत किया है, लेकिन साथ ही मांग की है कि शहर के सभी सेक्टरों में कचरा व्यवस्था की व्यापक जांच हो और स्थायी सुधार सुनिश्चित किया जाए। अब देखना होगा कि प्राधिकरण की यह सख्ती जमीनी स्तर पर बदलाव ला पाती है या नहीं।
जन स्वास्थ्य विभाग के नोडल अधिकारी एवं वर्क सर्किल एक वरिष्ठ प्रबंधक कपिल देव सिंह ने बताया कि कंपनी को पहले भी कई बार व्यवस्था सुधारने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन स्थिति में कोई ठोस सुधार नहीं हुआ। इसे अनुबंध का स्पष्ट उल्लंघन मानते हुए यह सख्त कदम उठाया गया है।
अधिकारियों ने साफ कहा है कि भविष्य में इस तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यदि दोबारा गड़बड़ी मिली तो कंपनी के खिलाफ और कड़ी कार्रवाई, यहां तक कि अनुबंध समाप्त करने तक की कार्रवाई की जा सकती है।
