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इलाहाबाद हाई कोर्ट का सख्त रुख: FIR में प्रोटोकॉल का पालन जरूरी

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) से एक FIR को लेकर स्पष्टीकरण मांगा है. कोर्ट ने सवाल पूछा है कि केंद्रीय मंत्री के नाम के आगे ‘माननीय’ (Hon’ble) सम्मानजनक उपाधि का जिक्र FIR में क्यों नहीं किया गया है. जस्टिस जे.जे. मुनीर और जस्टिस तरुण सक्सेना की दो-जजों की बेंच ने हर्षित शर्मा और दो और लोगों की ओर से की गई दायर एक याचिका पर सुनवाई के बाद यह आदेश दिया. इस याचिका में मथुरा में उनके खिलाफ दर्ज एक FIR को रद्द करने की मांग की गई थी.

31 मार्च को पारित आदेश में कोर्ट ने कहा कि भले ही शिकायतकर्ता ने ‘माननीय मंत्री’ उपाधि का जिक्र सही तरीके से न किया हो, लेकिन FIR लिखते समय इस सम्मानजनक उपाधि को शामिल करके प्रोटोकॉल का पालन करना पुलिस का कर्तव्य था.

अगली सुनवाई की तारीख क्या?

अगली सुनवाई के लिए 6 अप्रैल की तारीख तय करते हुए अदालत ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार के अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) अपने हलफनामे में यह स्पष्ट करेंगे कि माननीय केंद्रीय मंत्री के नाम के साथ आमतौर पर इस्तेमाल होने वाला सम्मानजनक शब्द ‘माननीय’ क्यों नहीं लगाया गया? और एक जगह तो उनका जिक्र सिर्फ उनके नाम से ही किया गया है. इसमें उनके नाम के आगे ‘श्री’ शब्द भी नहीं जोड़ा गया है.

पुलिस का फर्ज क्या?

कोर्ट ने कहा कि भले ही लिखित रिपोर्ट में पहले सूचना देने वाले ने मंत्री का जिक्र अनुचित तरीके से किया हो, लेकिन FIR लिखते समय पुलिस का यह फर्ज था कि वह प्रोटोकॉल का पालन करते हुए सम्मानजनक शब्द का इस्तेमाल करती, भले ही कोष्ठक में ही सही. केंद्रीय मंत्री का नाम FIR में दर्ज है.

अदालत ने रजिस्ट्रार (अनुपालन) को निर्देश दिया कि वे अदालत के आदेश की जानकारी अतिरिक्त मुख्य सचिव और मथुरा के SSP को 48 घंटे के भीतर दें.

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