नारी शक्ति वंदन कानून में संशोधन के लिए सरकार तैयार, बजट सत्र में लाया जा सकता है बिल
नई दिल्ली: नारी अधिनियम बिल जिसे आमतौर पर नारी शक्ति वंदन अधिनियम या महिला आरक्षण विधेयक (Women’s Reservation Bill) के नाम से जाना जाता है, एकबार फिर से चर्चा में है. बीजेपी के सूत्रों की मानें तो सरकार जनगणना और परिसीमन के प्रावधान हटाकर अब इसे अमल में लाना चाहती है, जिसपर संसद में सरकार के वरिष्ठ मंत्रियों के साथ अलग-अलग पार्टियों की बैठक भी हुई. सूत्रों के मुताबिक सरकार दो बड़े संशोधन लाने की तैयारी में है.
इसके अलावा लोकसभा में सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईरान युद्ध से पैदा हुए हालात पर भी व्यक्तव्य दिया. साथ ही देर शाम गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में एनडीए के सांसदों की बैठक भी हुई. हालांकि नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर विपक्ष की ज्यादातर पार्टियां सहमत हैं, मगर कांग्रेस ने अपने सांसदों की मंगलवार सुबह बैठक बुलाई है, जिसमें इसके प्रावधानों पर चर्चा की जाएगी. ये बात कांग्रेस की सांसद रजनी पाटिल ने बताई.
• 2023 में पारित नारी शक्ति वंदन अधिनियम में महिला आरक्षण को जनगणना 2027 और परिसीमन से जोड़ा गया था
• जनगणना में देरी के कारण अब 2011 की जनगणना के आधार पर ही आगे बढ़ने की योजना है
• इसी हफ्ते नारी शक्ति अभिनंदन अधिनियम में संशोधन बिल लाया जा सकता है
• लोकसभा सीटों में बढ़ोतरी से जुड़ा एक अलग बिल भी लाने की तैयारी
• परिसीमन और सीटों के पुनर्निर्धारण के लिए 2011 की जनगणना को आधार बनाया जाएगा
• संशोधन विधेयक पारित होने के बाद लोकसभा सीटें 543 से बढ़कर 816 हो सकती हैं
क्या है नारी शक्ति वंदन अधिनियम
संविधान (106वां संशोधन) अधिनियम, 2023: यह बिल 2023 में संसद के विशेष सत्र में पास हो चुका है, यह बिल लोकसभा में 20 सितंबर 2023 को 454 वोटों से पास हुआ था, जबकि राज्यसभा में सर्वसम्मति से पास हुआ था.
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 28 सितंबर 2023 को बिल को मंजूरी दी थी, और यह कानून बन गया.
लेकिन लागू होने की शर्त ये थी कि इसे अगली जनगणना और परिसीमन (delimitation) के बाद, जो 2026 के बाद होगा, उसके बाद ही लागू किया जा सकेगा, इसलिए अभी (2026 में) यह प्रभावी नहीं है, और यही वजह है कि लोकसभा और विधानसभाओं में 33% महिला आरक्षण का प्रावधान करने वाला यह कानून अभी तक लागू नहीं हो पाया है.
अब सरकार विपक्ष से संपर्क कर रही है कि अधिनियम को जल्द लागू करने के लिए परिसीमन की शर्त हटाई जाए. इसके लिए गृह मंत्री अमित शाह अलग-अलग पार्टियों के नेताओं के साथ भी बैठक कर रहे हैं. इस संबंध में सोमवार को गृह मंत्री अमित शाह ने संसद के चैंबर में YSRCP, AIMIM, एनसीपी (शरदचंद्र पवार) और कुछ अन्य पार्टियों के नेताओं के साथ बैठक की.
सूत्रों की मानें तो इससे पहले भी सरकार समाजवादी पार्टी, RJD, कांग्रेस और कुछ अन्य दलों के साथ एक दौर की बैठक कर चुकी है. सोमवार को देर शाम एनडीए के सांसदों की बैठक भी बुलाई गई जिसमें इसके प्रावधानों पर चर्चा हुई है. हालांकि सूत्रों की मानें तो इस अधिनियम को सरकार 29 या 28 मार्च को संसद में ला सकती है.
सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस 29 मार्च को इस पर चर्चा के लिए फिलहाल राजी नहीं है. हालांकि ये दोनों दिन शनिवार और रविवार हैं. मगर संसद की कार्यवाही पहले ही ईद और हिंदू नव वर्ष (नव संवत्सर) की छुट्टी होने की वजह से तय की जा चुकी है. हालांकि सरकार विपक्ष से संपर्क कर रही है कि बिल को जल्द लागू करने के लिए संशोधन (परिसीमन की शर्त हटाने के लिए) लाया जाए.
इस मुद्दे पर बात करते हुए कांग्रेस सांसद रजनी पाटिल ने कहा कि ये बिल हमारी सरकार के समय में ही पारित किया गया था और राजीव गांधी जी के समय में ही कांग्रेस ने महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने की बात शुरू कर दी थी. मगर सरकार इस बारे में चर्चा कर बताए कि वो अधिनियम को किस तरह से लागू करेगी, परिसीमन और जनगणना की जो बात थी, उस पर क्या प्रावधान होगा. उन्होंने कहा कि फिलहाल इसपर कांग्रेस ने अपने सांसदों की बैठक मंगलवार सुबह 10 बजे बुलाई गई है, उसके बाद ही पार्टी अपना निर्णय लेगी.
