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यूपी कैबिनेट के बड़े फैसले: गेहूं MSP में बढ़ोतरी, बिजली सस्ती और विकास परियोजनाओं को मिली मंजूरी

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में गेहूं का समर्थन मूल्य ₹160 बढ़ा दिया गया है. राज्य की नई गेहूं क्रय नीति को लागू किया गया है. उत्तर प्रदेश कैबिनेट मीटिंग मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में लोक भवन में सोमवार को आयोजित हुई. जिसमें गेहूं की नीति को हरी झंडी दे दी गई है. कुल 37 प्रस्ताव पेश किए गए हैं, जिनमें से दो स्थगित किए गए. जबकि 35 पास हुए. कैबिनेट मीटिंग में लखनऊ में प्रदेश के सबसे बड़े कन्वेंशन सेंटर के लिए रिवाइज बजट को स्वीकृति दी गई. इसमें लखनऊ के दुबग्गा में फ्लाईओवर को भी हरी झंडी मिली. उद्योगों के लिए कई बड़े प्रस्ताव पास किए. राज्य के 17 नगर निगम के अलावा 58 नगर पालिका को भी स्मार्ट सिटी बनाया जाएगा.

उत्तर प्रदेश कैबिनेट ने सोमवार को कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी है, जिसमें किसानों, ऊर्जा, शहरी विकास, पर्यावरण संरक्षण और औद्योगिक क्षेत्र से जुड़े फैसले शामिल हैं. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में कुल 37 प्रस्ताव मंत्री परिषद के समक्ष लाए गए थे, जिनमें से दो प्रस्ताव स्थगित किए गए. बैठक में पारित प्रमुख निर्णयों ने राज्य के विकास को नई गति प्रदान करने का संकेत दिया है.

यह रहेगा गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य: कृषि विभाग से संबंधित सबसे महत्वपूर्ण फैसला गेहूं की खरीद नीति का रहा. कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने बताया कि केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य इस वर्ष 2585 रुपए प्रति क्विंटल तय किया गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 160 रुपए प्रति क्विंटल की वृद्धि दर्शाता है. यह बढ़ोतरी किसानों को बेहतर मूल्य सुनिश्चित करने और उनकी आय बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है. गेहूं की खरीद 30 मार्च से 15 जून तक चलेगी. राज्य में 8 क्रय एजेंसियों एफसीआई, यूपी मंडी परिषद, पीसीएफ, पीसीयू, यूपीएसएस, नैफेड, एनसीसीएफ के माध्यम से यह प्रक्रिया संचालित होगी. कुल 6500 क्रय केंद्र सभी 75 जिलों में स्थापित किए गए हैं. अधिकांश किसानों से खरीद का प्रयास किया जाएगा. क्रय केंद्रों पर छाया और पानी की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी. इस वर्ष गेहूं की फसल अच्छी हुई है, इसलिए प्रारंभिक 30 लाख मीट्रिक टन के लक्ष्य को बढ़ाकर 50 लाख मीट्रिक टन कर दिया गया है.पूरी खरीद प्रक्रिया ऑनलाइन व्यवस्था के तहत पारदर्शी तरीके से की जाएगी, जिससे किसानों को त्वरित भुगतान और सुविधा मिलेगी.

घाटमपुर पॉवर प्लांट से जुड़े प्रस्ताव को मंजूरी : ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने बताया कि ऊर्जा विभाग के तहत घाटमपुर पॉवर प्लांट से जुड़े प्रस्ताव को मंजूरी मिली है. प्लांट में 660 मेगावाट क्षमता की तीन यूनिट लगाने का प्रावधान था. दो यूनिट पहले से प्रारंभ हो चुकी हैं, जबकि तीसरी जल्द शुरू होगी.प्लांट के लिए 2016 में भारत सरकार द्वारा झारखंड के दुमका जिले में पछवारा कोल माइन आवंटित की गई थी. कोल ब्लॉक के विकास के लिए कुल ₹2242.90 करोड़ की राशि कैबिनेट ने स्वीकृत की. यह प्लांट भारत सरकार और प्रदेश सरकार का संयुक्त उपक्रम है, जो राज्य की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करेगा.

गोरखपुर सोलर सिटी: नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में गोरखपुर को सोलर सिटी के रूप में विकसित करने का फैसला लिया गया. अयोध्या के बाद अब गोरखपुर के चिलुआताल पर 20 मेगावॉट क्षमता का फ्लोटिंग सोलर प्लांट लगाया जाएगा. यह प्लांट कोल इंडिया लिमिटेड द्वारा स्थापित किया जाएगा. उत्तर प्रदेश में पहले से ही दो फ्लोटिंग सोलर प्लांट कार्यरत हैं. जनपद औरैया में एनटीपीसी द्वारा 20 मेगावाट और खुर्जा में टीएचडीसी द्वारा 11 मेगावाट का है . फ्लोटिंग सोलर प्लांट जल सतह पर लगाए जाते हैं, जिससे भूमि की बचत होती है और जलाशयों में वाष्पीकरण कम होता है.

58 नगर पालिका बनेंगी स्मार्टशहरी विकास के क्षेत्र में 17 नगर निगमों में स्मार्ट सिटी मिशन के तहत कार्य तेज किया जा रहा है. अब नवयुग पालिका योजना के अंतर्गत 58 जिला मुख्यालयों की नगर पालिकाओं में स्मार्ट सुविधाएं लागू होंगी. इसके अलावा 55 नगर पालिकाओं और तीन ग्राम पंचायतों को भी इस योजना में शामिल किया जाएगा. लखनऊ की वृंदावन कॉलोनी में कन्वेंशन सेंटर निर्माण के लिए संशोधित बजट ₹1435.25 करोड़ को अनुमोदित किया गया. जल संरक्षण और पुनर्चक्रण को बढ़ावा देने के लिए नई वाटर रिसाइकिल नीति को मंजूरी मिली. सेफ यूज ऑफ ट्रीटेड वाटर के तहत उपचारित जल का दोबारा उपयोग गैर-पेयजल कार्यों जैसे उद्योग, सिंचाई, सफाई आदि में किया जाएगा. इससे जल संकट से निपटने में मदद मिलेगी.

दुबग्गा चौराहे पर फ्लाईओवर: लोक निर्माण विभाग के तहत लखनऊ के दुबग्गा चौराहे पर 1811 मीटर लंबा फ्लाईओवर बनाने के लिए 305.31 करोड़ की मंजूरी दी गई, जो यातायात जाम को कम करेगा. औद्योगिक विकास के लिए उत्तर प्रदेश निजी नॉलेज पार्क नीति को स्वीकृति मिली. वरिष्ठ आईएएस अधिकारी आलोक कुमार के अनुसार, इस नीति के तहत निजी क्षेत्र को बिना शुल्क के जमीन उपलब्ध कराई जाएगी, जिसका मूल्य 45 वर्ष में लिया जाएगा. संभल में गंगा एक्सप्रेसवे के किनारे लॉजिस्टिक सेंटर स्थापित किया जाएगा. दूसरी ओर, जहां ईस्टर्न और वेस्टर्न कॉरिडोर जुड़ते हैं, वहां ग्रेटर नोएडा में बड़ा लॉजिस्टिक और वेयर हाउस हब बनेगा. इसके लिए 175 एकड़ जमीन नीलामी के माध्यम से दी जाएगी.

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