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श्रीराम मंदिर के शिखर पर बदला गया ध्वज, सैन्य तकनीक और परंपरा का अद्भुत मेल

अयोध्या। श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने राम मंदिर के मुख्य शिखर पर नई धर्म ध्वजा का आरोहण कराया है। चैत्र नवरात्र के प्रथम दिन गुरुवार को सायंकाल ट्रस्ट ने नया ध्वज फहराया है। यह धर्म ध्वजा भी पूर्व की भांति आकार-प्रकार में समान है।

इसे ट्रस्ट ने स्वयं के स्तर से पुली व रस्सी के सहारे आरोहित कराया। ट्रस्ट ने अब प्रत्येक नवरात्र में धर्म ध्वजा को बदलने का निर्णय लिया है। चैत्र नवरात्र में फहराया गया ध्वज शारदीय नवरात्र में बदल दिया जाएगा।

मंदिरों का निर्माण पूर्ण हो जाने के पश्चात गत 25 नवंबर को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डा. मोहन भागवत की उपस्थिति में राम मंदिर के लगभग 161 फीट ऊंचे मुख्य शिखर पर धर्म ध्वजा का आरोहण किया था। इसके पश्चात धार्मिक परंपरा के अनुसार श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने भी नवरात्र में ध्वजा को बदलने का निर्णय किया था।

इसी क्रम में गुरुवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के परिसर से प्रस्थान करने के बाद ट्रस्ट ने नई धर्म ध्वजा का आरोहण कराया। इसमें कार्यदायी एजेंसी लार्सन एंड टुब्रो (एलएंडटी) व टाटा कंसल्टिंग इंजीनियर्स (टीसीई) के अभियंताओं से भी सहयोग व परामर्श लिया गया।

राम मंदिर के व्यवस्थापक गोपाल राव ने बताया कि नए ध्वज पर भी अयोध्या का राजचिह्न कोविदार वृक्ष और सूर्यवंश के प्रतीक सूर्य की आकृति उकेरी है। इस ध्वजा की भी लंबाई 22 फीट, ऊंचाई 11 फीट और वजन चार किलोग्राम है।

भगवा रंग के इस ध्वज को भी पैराशूट के कपड़े से तैयार किया गया है। ट्रस्टी डा. अनिल कुमार मिश्र ने बताया कि अब वर्ष में दो बार धर्म ध्वजा को बदला जाएगा। कहा कि रामनगरी के सभी मंदिरों में नवरात्र में ही ध्वजा बदलने की परंपरा रही है। उसी का पालन राम मंदिर ट्रस्ट भी कर रहा है।

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