एक वर्ष बाद आईएएस अभिषेक प्रकाश की सेवा में वापसी
लखनऊ: पिछले काफी समय से निलंबन झेल रहे 2006 बैच के आईएएस अधिकारी अभिषेक प्रकाश को उत्तर प्रदेश सरकार ने बहाल कर दिया था. अब सरकार ने उन्हें सचिव, सामान्य प्रशासन विभाग के पद पर नई तैनाती दी है. अभिषेक प्रकाश को लगभग एक साल के निलंबन के बाद दो दिन पहले ही सेवा में वापस लिया गया था. उनकी बहाली के साथ ही ब्यूरोक्रेसी में चल रही चर्चाओं पर विराम लग गया है.
भ्रष्टाचार के आरोप और एसटीएफ जांच: अभिषेक प्रकाश पर सोलर इंडस्ट्री प्रोजेक्ट की मंजूरी के लिए एक करोड़ रुपए कमीशन मांगने के गंभीर आरोप लगे थे. आरोप था कि उन्होंने अपने करीबी बाबू निकांत जैन के माध्यम से बिजनेसमैन विश्वजीत दत्ता से रिश्वत मांगी थी. कमीशन न मिलने पर प्रोजेक्ट की फाइल रोकने की शिकायत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक पहुंची थी. मुख्यमंत्री के निर्देश पर स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने मामले की जांच की और बाबू निकांत जैन को गिरफ्तार किया था.
कोर्ट में पलटा मामला, मिली राहत: बाबू निकांत जैन ने पूछताछ में स्वीकार किया था कि रिश्वत की मांग आईएएस अधिकारी के कहने पर की गई थी. हालांकि, 10 फरवरी को लखनऊ हाईकोर्ट में इस मामले ने तब नया मोड़ लिया जब शिकायतकर्ता विश्वजीत दत्ता अपनी बात से मुकर गए. उन्होंने अदालत में कहा कि गलतफहमी के कारण उन्होंने शिकायत दर्ज कराई थी. इसके बाद न्यायालय ने मामले को रद्द कर दिया, जिससे अभिषेक प्रकाश की बहाली का रास्ता साफ हो गया.
ब्यूरोक्रेसी में मजबूत पकड़: अभिषेक प्रकाश को ब्यूरोक्रेसी में मजबूत पकड़ रखने वाला अधिकारी माना जाता है. मूल रूप से बिहार के रहने वाले अभिषेक का जन्म 1982 में हुआ था और वे बीटेक के साथ लोक प्रशासन में स्नातकोत्तर हैं. निलंबन के समय वे इन्वेस्ट यूपी के सीईओ और औद्योगिक विकास विभाग के सचिव जैसे महत्वपूर्ण पदों पर तैनात थे. वे लखनऊ सहित हमीरपुर, अलीगढ़, बरेली और लखीमपुर खीरी के जिलाधिकारी के रूप में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं.
विशेष सचिव के पद पर रह चुके हैं: अपने करियर के दौरान वे गृह विभाग और चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग में विशेष सचिव के पदों पर भी रहे हैं. उनके पास प्रशासनिक कार्यों का व्यापक अनुभव है, जिसका लाभ अब सामान्य प्रशासन विभाग को मिलेगा. शासन ने उनकी योग्यता और पूर्व के रिकॉर्ड को देखते हुए उन्हें एक बार फिर मुख्यधारा की जिम्मेदारी सौंपी है. अब वे सचिव के रूप में सरकार के प्रशासनिक कार्यों को गति प्रदान करेंगे.
