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हरियाणा राज्यसभा चुनाव: कांग्रेस और भाजपा ने विधायकों को लेकर रणनीति बदल दी

चंडीगढ़। हरियाणा में राज्यसभा की दो सीटों पर 16 मार्च को होने वाले चुनाव के मद्देनजर राजनीतिक दल एक दूसरे को चकमा देने के लिए अपनी रणनीति बदल रहे हैं। विधानसभा में विपक्ष के नेता एवं पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने 13 मार्च को अपनी पार्टी के विधायकों का डिनर स्थगित कर उन्हें दोपहर के भोजन (लंच) पर बुला लिया है।

लंच से पहले हुड्डा कांग्रेस विधायक दल की बैठक लेंगे, जिसमें हरियाणा कांग्रेस के प्रभारी बीके हरिप्रसाद, दोनों सह प्रभारी जितेंद्र बघेल और प्रफुल्ल गुडधे तथा प्रदेश अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह भी शामिल होंगे। इसी बैठक में तय होगा कि कांग्रेस के विधायकों को हिमाचल अथवा कर्नाटक घूमने के लिए भेजा जाए अथवा नहीं।

पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा सोमवार को विधानसभा के बजट सत्र की कार्यवाही खत्म होने के बाद से चंडीगढ़ में ही डटे हुए हैं। वे लगातार विधायकों से चर्चा कर रहे हैं। भाजपा की रणनीति पर हुड्डा की पूरी निगाह है। कांग्रेस पार्टी के ऐसे विधायकों पर बारीकी से निगाह रखी जा रही है, जिन्हें भाजपा के रणनीतिकारों की तरफ से चाय अथवा काफी पीने या पिलाने की पेशकश आ रही है।

विधायकों को कहां भेजने की तैयारी?

ऐसे विधायकों को भी चिन्हित किया जा रहा है, जो भाजपा के रणनीतिकारों की चाय पी चुके हैं अथवा पी सकते हैं। इन्हीं विधायकों की इच्छा का सम्मान करते हुए उन्हें चंडीगढ़ से बाहर हिमाचल अथवा कर्नाटक घूमने के लिए भेजा जा सकता है।

पिछली मीटिंग में कई विधायकों ने घूमने जाने की इच्छा जाहिर की थी। प्रदेश प्रभारी की भी यही इच्छा थी, लेकिन भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कह दिया था कि अभी कहीं कोई नहीं जा रहा है। सब चंडीगढ़ में रहेंगे। मगर जिस तरह से भाजपा के रणनीतिकारों ने एकाएक सक्रियता बढ़ाई, उसे देखते हुए कांग्रेस ने भी अपनी रणनीति बदली है।

हुड्डा की पूरी कोशिश है कि कांग्रेस प्रत्याशी कर्मवीर बौद्ध के हिस्से वाली सीट पर भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष सतीश नांदल को निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में जीत हासिल न करने दी जाए। इसके लिए हुड्डा को अपने विधायकों पर भरोसा है, लेकिन भाजपा के रणनीतिकार सतीश नांदल की जीत को लेकर पूरी तरह से आशान्वित नजर आ रहा है।

भाजपा की राज्यसभा सदस्य किरण चौधरी व रामचंद्र जांगड़ा का कार्यकाल पूरा होने की वजह से दो सीटों पर चुनाव हो रहा है। एक सीट पर भाजपा उम्मीदवार संजय भाटिया का राज्यसभा सदस्य चुना जाना तय है, जबकि दूसरी सीट पर कांग्रेस ने कर्मवीर बौद्ध को अपना उम्मीदवार बनाया है। कर्मवीर बौद्ध अधिकतर विधायकों की पसंद नहीं हैं, लेकिन फिर भी पार्टी उम्मीदवार के नाते भूपेंद्र सिंह हुड्डा उनकी पूरी मदद कर रहे हैं।

भाजपा उठा सकती है नाराज विधायकों का फायदा

कांग्रेस विधायकों की नाराजगी का फायदा उठाने के लिए ही भाजपा ने हुड्डा के धुर राजनीतिक विरोधी सतीश नांदल को निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनावी रण में उतारा है। 90 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा के 48 विधायक हैं और तीन निर्दलीय विधायकों का समर्थन हासिल है। कांग्रेस के 37 विधायक हैं, जबकि इनेलो के दो विधायक हैं।

राज्यसभा के चुनाव में इनेलो के दो विधायकों की भूमिका तय करने के लिए इनेलो सुप्रीमो अभय सिंह चौटाला ने पार्टी की कोर कमेटी और पालिटिकल अफेसर कमेटी (पीएससी) की बैठक बुलाई है। उन्होंने बताया कि जनभावनाओं का सम्मान करते हुए पूरी कमेटी फैसला लेगी। उन्होंने कहा कि जब से मेरा वोट बना है, तब से मैंने अपना वोट कांग्रेस के पक्ष में नहीं डाला और न ही हुड्डा के पक्ष में डाल सकता।

उन्होंने हुड्डा के उस बयान को उनके विरुद्घ रिपीट किया, जिसमें हुड्डा ने अभय चौटाला पर तंज कसते हुए कहा था कि चुनाव में पता चल जाएगा कि इनेलो ही भाजपा की बी टीम है। अभय चौटाला ने कहा कि राज्यसभा चुनाव के नतीजे आने दो, फिर पता चलेगा कि भाजपा की बी टीम हुड्डा हैं। इस चुनाव में कांग्रेस के विधायकों में भगदड़ मचने वाली है। बीजेपी ने तीसरा उम्मीदवार भूपेंद्र सिंह हुड्डा से पूछकर ही खड़ा किया है।

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