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‘मिडिल ईस्ट संकट का असर देशवासियों पर न पड़े…’, PM मोदी ने मं​त्रियों को दिए ये निर्देश

नई दिल्ली: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और ईरान-इजरायल युद्ध के बीच पीएम मोदी ने देश की ऊर्जा सुरक्षा और आम आदमी की जेब को बचाने के लिए मोर्चा संभाल लिया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंत्रियों को स्पष्ट संदेश दिया कि अंतरराष्ट्रीय संकट का बोझ आम नागरिकों पर नहीं पड़ना चाहिए. पीएम ने खासतौर पर महंगाई, ईंधन आपूर्ति और जरूरी वस्तुओं की उपलब्धता पर सतर्क रहने को कहा. सरकारी सूत्रों के मुताबिक भारत ने कच्चे तेल और गैस की आपूर्ति के लिए अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव किया है जिससे अंतरराष्ट्रीय संकट के बावजूद घरेलू बाजार में कोई किल्लत न हो.

सरकार ने विशेष रूप से कमर्शियल और डोमेस्टिक एलपीजी (LPG) सप्लाई को प्राथमिकता पर रखा है. रेस्टोरेंट एसोसिएशन की दिक्कतों को समझते हुए ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को उनसे सीधे संवाद करने के निर्देश दिए गए हैं. इसके लिए बकायदा एक हाई-लेवल कमेटी बनाई गई है जो आपूर्ति की निगरानी कर रही है. भारत ने न केवल घरेलू उत्पादन बढ़ाया है बल्कि आयात के लिए वैकल्पिक समुद्री रास्तों का उपयोग कर अपनी निर्भरता को सुरक्षित कर लिया है. अधिकारियों का दावा है कि भारत इस वैश्विक मुश्किल से अन्य देशों की तुलना में कहीं बेहतर स्थिति में और मजबूती के साथ बाहर निकलेगा.

सरकार की रणनीति के मुख्य प्‍वाइंट्स

·         LPG संकट समाधान: IOC, HPCL और BPCL के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर्स की 3 सदस्यीय कमेटी बनाई गई है. यह कमेटी रेस्टोरेंट एसोसिएशन से बात कर उनकी जरूरतों को पूरा करेगी और सप्लाई को ‘रीप्रायोरिटाइज़’ (पुनः प्राथमिकता) करेगी.

·         उत्पादन में उछाल: सप्लाई मैनेजमेंट की वजह से पिछले कुछ दिनों में घरेलू एलपीजी उत्पादन में 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है.

·         आपूर्ति के नए रास्ते: भारत अपनी 70 प्रतिशत क्रूड ऑयल सप्लाई अब स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बजाय अन्य वैकल्पिक रास्तों से प्राप्त कर रहा है.

·         रिफाइनरी ऑपरेशन: देश की सभी रिफाइनरियां अपनी पूरी क्षमता के साथ काम कर रही हैं. ईरान-इजरायल संघर्ष का इनके परिचालन पर कोई असर नहीं पड़ा है.

·         निर्यात नीति: सरकार ने स्पष्ट किया है कि रिफाइंड तेल के एक्सपोर्ट पर रोक लगाने का फिलहाल कोई फैसला नहीं लिया गया है.

·         नया कंसाइनमेंट: एलपीजी और एलएनजी (LNG) के नए कंसाइनमेंट जल्द ही भारत पहुंचने वाले हैं, जिससे स्टॉक की स्थिति और मजबूत होगी.

क्यों भारत के लिए कम है खतरे की घंटी?

मिडिल ईस्ट संकट के दौरान अक्सर कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और सप्लाई चेन टूटने का डर रहता है लेकिन इस बार भारत की तैयारी प्रो-एक्टिव नजर आ रही है. सरकार का यह दावा कि हम मुश्किलों में थे लेकिन आज पेट्रोलियम संकट में नहीं हैं, भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा आत्मविश्वास दर्शाता है.

काफी डायवर्स है भारत का एनर्जी सेक्‍टर

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर निर्भरता कम करना एक रणनीतिक जीत है क्योंकि युद्ध की स्थिति में यह रास्ता सबसे पहले प्रभावित होता है. इसके अलावा कमर्शियल एलपीजी की जरूरतों के लिए अलग से कमेटी बनाना यह सुनिश्चित करता है कि खाद्य और सेवा क्षेत्र में महंगाई न बढ़े. सरकार का ध्यान आम आदमी पर केंद्रित है, जिसका अर्थ है कि आने वाले दिनों में पेट्रोल, डीजल और गैस की कीमतों में किसी बड़े अनियंत्रित उछाल की संभावना कम है. भारत का यह मॉडल दिखाता है कि सही ‘डायवर्सिफिकेशन’ (आपूर्ति विविधीकरण) से वैश्विक युद्धों के आर्थिक झटकों को झेला जा सकता है.

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