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CAIT Report: 50,000 करोड़ के बिजनेस साथ छठ पूजा ने भरा देश का खजाना! सूप, गन्ना और ठेकुआ सबसे ज्यादा बिकने वाली चीज़ें बनी

देशभर में मंगलवार को छठ पूजा का संमापन हुआ। इस त्याहोर के बीच हुई सेल को रिपोर्ट सामने आई है। CAIT ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि इस पर्व के दौरान देश में 50,000 करोड़ रुपये से अधिक का बड़ा व्यापार उत्पन्न किया।

सनातन अर्थव्यवस्था की ताकत

त्योहार के बाद CAIT द्वारा किए गए मूल्यांकन से यह सामने आया है कि इस वर्ष 10 करोड़ से अधिक लोगों ने छठ पूजा समारोहों में हिस्सा लिया। CAIT के महासचिव और सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने बताया कि ये आँकड़े भारत की “सनातन अर्थव्यवस्था” पर उनके चल रही स्टडी का हिस्सा हैं, जिसके तहत प्रमुख त्योहारों और विवाह के मौसम में खर्च के पैटर्न का अध्ययन किया जाता है।

किस राज्य में कितना व्यापार?

यह त्यौहार मुख्य रूप से बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश (पूर्वांचल क्षेत्र) में केंद्रित रहा, जहाँ नदियों और तालाबों के किनारे बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी।

  • बिहार: अकेले बिहार में लगभग 15,000 करोड़ रुपये की रिकॉर्ड व्यावसायिक गतिविधि देखी गई।
  • दिल्ली: पूर्वांचली आबादी की बड़ी संख्या के कारण दिल्ली में 8,000 करोड़ रुपये का बड़ा व्यापार हुआ।
  • झारखंड: झारखंड में भी 5,000 करोड़ रुपये का व्यापार हुआ।

इसके अलावा पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और राजस्थान जैसे राज्यों में भी आर्थिक गतिविधियों में तेज़ी आई। प्रवासी समुदायों की उपस्थिति के कारण कर्नाटक, तेलंगाना और ओडिशा जैसे महानगरों और गैर-पारंपरिक राज्यों के स्थानीय बाज़ारों में भी अच्छी बिक्री दर्ज की गई।

CAIT के अनुसार छठ पूजा के दौरान बाज़ारों में बिकने वाली वस्तुओं में मुख्य रूप से स्वदेशी उत्पादों का बोलबाला रहा। इनमें शामिल थे:

  • पूजा सामग्री: बाँस की टोकरियाँ (सूप/दउरा), दीये, फूल, मिट्टी के बर्तन।
  • खाद्य पदार्थ: गन्ना, नारियल, केले, विभिन्न प्रकार के फल, चावल, अनाज और पारंपरिक मिठाइयाँ जैसे ठेकुआ और लड्डू।
  • सेवाएँ: घाट निर्माण, प्रकाश व्यवस्था, स्वच्छता कार्य और नाव की सवारी से संबंधित सेवाओं की माँग में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई।

दिल्ली सरकार ने भी लगभग 1,500 घाटों का निर्माण किया, जिस पर बुनियादी ढाँचे, स्वच्छता और सुरक्षा व्यवस्था के लिए बड़ा खर्च किया गया।

खंडेलवाल ने इस व्यापारिक उछाल के पीछे दो मुख्य कारणों का उल्लेख किया:

1.      स्वदेशी उत्पादों को प्रोत्साहन: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने के आह्वान के कारण स्थानीय कारीगरों, बाँस की टोकरी बनाने वालों और गुड़ उत्पादकों को सीधे फायदा मिला। पूरे देश में “स्वदेशी छठ” अभियान चलाए गए।

2.      जीएसटी बचत उत्सव: दिवाली के दौरान शुरू किया गया “जीएसटी बचत उत्सव” छठ पूजा के समय भी जारी रहा, जिससे उपभोक्ता मांग को और बढ़ाने में मदद मिली।

खंडेलवाल ने कहा कि दोनों त्योहारों ने मिलकर सभी क्षेत्रों में उपभोक्ता मांग को बढ़ाने और अर्थव्यवस्था को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

NEWS SOURCE Credit :punjabkesari

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